कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कांग्रेस कार्य समिति की बैठक में केंद्र सरकार पर जमकर हमला बोला।

नई दिल्ली :काग्रेस कार्य समिति की बैठक में आज कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने किसान आंदोलन लखीमपुर खीरी हिंसा महंगाई, विदेश नीति और चीन की आक्रामकता के मुद्दों को लेकर नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर निशाना साधा। सोनिया ने जम्मू-कश्मीर में पिछले दिनों कई अल्पसंख्यकों की हुई हत्या की निंदा की और कहा कि दोषियों को न्याय के कठघरे में लाने और इस केंद्रशासित प्रदेश में शांति एवं सौहार्द बहाल करने की जिम्मेदारी केंद्र की है। सोनिया ने लखीमपुर खीरी की घटना का हवाला देते हुए कहा कि इससे किसान आंदोलन को लेकर बीजेपी की सोच का पता चलता है। कांग्रेस अध्यक्ष ने दावा किया कि बीजेपी सरकार ने संसद से जो ‘तीन काले कानून’ पारित करवाएं हैं वो कुछ उद्योगपतियों को फायदा पहुंचाने वाले हैं।

कांग्रेस अध्यक्ष ने अर्थव्यवस्था की स्थिति को लेकर सरकार पर निशाना साधा और कहा कि यह सरकार अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने का सिर्फ एक ही उपाय जानती है और यह है उन राष्ट्रीय संपत्तियों को बेचना है जिनको बनाने में दशकों का समय लगा है। सोनिया ने आरोप लगाया, ‘मोदी सरकार का एक सूत्री एजेंडा “बेचो बेचो और बेचो” है। देश में किसी ने कल्पना भी नहीं की थी कि पेट्रोल की कीमत 100 रुपये प्रति लीटर, गैस सिलेंडर का दाम 900 रुपये और खाने के तेल की कीमत 200 रुपये के पार चली जाएगी। इससे लोगों के जीवन पर असहनीय बोझ पड़ रहा है।’

सोनिया के मुताबिक, केंद्र सरकार ने राज्य सरकारों की मांग के बाद वैक्सीनेशन नीति में बदलाव किया और सहकारी संघवाद आज भी बीजेपी सरकार के लिए सिर्फ एक नारा मात्र है। विदेश नीति के मुद्दे को लेकर सरकार पर निशाना साधते हुए सोनिया ने कहा, ‘देश में विदेश नीति को लेकर हमेशा एक व्यापक सहमति रही है। लेकिन मोदी सरकार ने विपक्ष को सार्थक ढंग से साथ लेने का प्रयास नहीं किया जिससे इससे यह सहमति कमजोर हुई है।’


सीमा पर चीन की आक्रमकता का उल्लेख करते हुए सोनिया ने कहा, ‘प्रधानमंत्री ने पिछले साल विपक्षी नेताओं से कहा था कि चीन ने हमारी सीमा के भीतर कोई कब्जा नहीं किया है और इसके बाद से उन्होंने जो चुप्पी साधी है उसकी कीमत देश चुका रहा है।’ उन्होंने आरोप लगाया कि इस सरकार के लिए विदेश नीति चुनावी माहौल बनाने और ध्रुवीकरण का एक औजार बनकर रह गई है।
कांग्रेस कार्य समिति की बैठक में राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राहुल गांधी को कांग्रेस अध्यक्ष बनाए जाने का प्रस्ताव दिया है। सूत्रों के मुताबिक, अशोक गहलोत ने कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक में प्रस्तावित किया कि राहुल गांधी को कांग्रेस का नेतृत्व करना चाहिए, जिसे सी डब्ल्यू सी के सभी सदस्यों का समर्थन भी मिला। फिलहाल सोनिया गांधी देश की सबसे पुरानी पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष हैं।

राहुल गांधी ने 2017 में कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में पदभार संभाला था। लेकिन 2019 में लोकसभा चुनावों में कांग्रेस को मिली करारी हार के बाद उन्होंने पद छोड़ दिया। वायनाड सांसद राहुल के इस्तीफे के बाद कांग्रेस के भीतर हंगामा खड़ा हो गया। कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने राहुल को समझाने का प्रयास भी किया, लेकिन असफलता हाथ लगी। इसके बाद 19 सालों तक कांग्रेस का नेतृत्व करने वाली सोनिया गांधी ने अंतरिम अध्यक्ष के रूप में लौटने के लिए हामी भरी।
वहीं, ये पहला मौका नहीं है, जब राजस्थान के मुख्यमंत्री गहलोत ने राहुल गांधी को कांग्रेस अध्यक्ष बनाने की मांग की है। इससे पहले पिछले साल जून में हुई सी डब्ल्यू सी की बैठक में भी गहलोत ने राहुल को अध्यक्ष बनाने की मांग की थी।

गहलोत ने कहा था कि राहुल के लिए एक बार फिर से संगठन की बागडोर संभालने का समय आ गया है। उन्हें इस दौरान उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता हरीश रावत का समर्थन भी मिला था। हालांकि, अन्य वरिष्ठ नेताओं ने इस पर कोई टिप्पणी नहीं की थी। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कपिल सिब्बल समेत ‘जी 23’ कमेटी के कुछ नेताओं की ओर से पिछले दिनों सार्वजनिक रूप से बयान दिए जाने की पृष्ठभूमि में शनिवार को उन्हें निशाने पर लिया। इस दौरान सोनिया ने उन्हें नसीहत देते हुए कहा कि वह ही पार्टी की स्थायी अध्यक्ष हैं तथा उनसे बात करने के लिए मीडिया का सहारा लेने की जरूरत नहीं है। उन्होंने सी डब्ल्यू सी की बैठक में बताया कि अध्यक्ष के चुनाव की प्रक्रिया 30 जून तक पूरी की जानी थी, लेकिन कोरोनावायरस के कारण ही इसे टालना पड़ा तथा अब इसकी रूपरेखा तय की जाएगी।

रिपोर्ट – आर डी अवस्थी

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