जनता और कार्यकर्ताओं की उपेक्षा कर हित साधने वाले भाजपा विधायकों के लिए टिकट बचाना मुश्किल!

विपक्षी दलों से कड़ी प्रतिस्पर्धा झेल रही भारतीय जनता पार्टी उत्तर प्रदेश में सन्निकट विधानसभा चुनाव में अपने बेहतर प्रदर्शन के लिए लगातार चिंतन बैठकों में विधायकों की कार्यशैली की समीक्षा कर रही है। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का यह साफ तौर पर मानना है कि उत्तर प्रदेश में लगभग डेढ़ सौ विधायकों के टिकट समीक्षा के दायरे में हैं इन विधायकों के टिकट काटे जा सकते हैं ।

यह वह विधायक हैं जिन्होंने 5 साल सत्ता की मलाई का आनंद लिया अपने और अपनों को फायदा पहुंचाने में जुटे रहे कार्यकर्ताओं और जनता की उपेक्षा करते रहे। ऐसे विधायक बड़ी संख्या में चिन्हित किए गए हैं और जल्द ही इनके बारे में ठोस फैसला लिया जाएगा।

पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने प्रदेश संगठन को ऐसे विधायकों की सूची को अंतिम रूप देने के निर्देश दिए हैं जिनका टिकट काटा जाना जरूरी है । पार्टी के पास विधायकों के खिलाफ सैकड़ों की संख्या में शिकायतें पहुंची हैं ।
गोपनीय सर्वे में भी पार्टी को बहुत से ऐसे विधायकों के बारे में जानकारी मिली है जो जनता की सेवा से ज्यादा ठेका पट्टा और जमीनों के व्यवसाय में अपने प्रभाव का दुरुपयोग करके करोड़ों रुपए कमा चुके हैं ।

प्रदेश मुख्यालय पर बैठने वाले भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से जुड़े सूत्रों ने बताया कि ऐसे विधायकों की संख्या डेढ़ सौ के आसपास है जिनके खिलाफ पार्टी के पास बहुत सी शिकायतें पहुंची हैं इन शिकायतों की जांच अब अंतिम दौर में पहुंच रही है और पार्टी ऐसे किसी विधायक को टिकट नहीं देगी जिसकी छवि जनता के बीच में दागदार है जिसके बारे में लोगों की आम राय ठीक नहीं है।

गौरतलब है कि इस बार के विधानसभा चुनाव में सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी को समाजवादी पार्टी के साथ साथ कांग्रेस और बहुजन समाज पार्टी से भी मजबूत प्रतिद्वंदिता का सामना करना पड़ रहा है । पार्टी को गोपनीय सर्वे से यह आभास हुआ है की बहुत से विधायकों ने पार्टी की छवि को खराब करने का काम किया है इसलिए पार्टी ऐसे विधायकों को ठिकाने लगाने के बारे में जल्द ही अंतिम फैसला करेगी।

दीपक मिश्रा, द इंडियन ओपिनियन
लखनऊ

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