टमाटर की फसल के इस विनाशकारी रोग से किसान हो जाए सावधान

टमाटर में अगेती एवं पछेती झुलसा रोग के लक्षण एवं नियंत्रण के उपाय

टमाटर के पौधों में झुलसा रोग का प्रतिकूल असर होता है। टमाटर में अगेती झुलसा रोग के साथ पछेती झुलसा रोग का प्रकोप भी होता है। इन रोगों से टमाटर के उत्पादन में भारी कमी आती है।

टमाटर में अगेती झुलसा के लक्षण नर्सरी में एवं पौध लगाने के बाद खेतो में पत्तियों पर छोटे - छोटे धब्बे के रूप में दिखाई देता है प्रारंम्भ में ये धब्बे बिखरे हुये गोलाकार , अंडाकार या कोणीय हो सकते है । प्रभावित पत्तियां पीली पड़कर झड़ जाती है तथा फल सड़ जाता है ।

रोग का कारण : – आल्टर्नेरिया सोलेनाई

रोगचक्र एवं अनुकूल वातावरण :

यह रोग फफूद से उत्पन्न होता है जो कि वैकल्पिक परजीवी गुण वाला होता है । यह मूल रूप से मृतजीवी होता किंतु अनुकूल दशा मिलने पर परजीवी हो जाता है । इस तरह रोगजनक पौध अवशेषों पर मृतजीवी के रूप मे अगले वर्ष तक जीवित रहता है । रोगजनक बीज की बाह्य सतह पर भी होता है यदि संक्रमित फलों से बीज एकत्रीत किया जाए तो रोगजनक बीज पर से एक पौधे से दुसरे पौधे में संक्रमण कर देता है । रोग का प्राथमिक संक्रमण पत्तियों पर प्रकट होता है और सम्पूर्ण फसल के लिए द्वितीयक संक्रमण का स्रोत भी बनता है । अगेती झुलसा तापमान में अत्यधिक गिरावट एवं वायुमंडल में आर्द्रता की अधिकता में रोग का फैलाव तेजी से होता है ।

  • पछेती झुलसा
    रोग के लक्षण सबसे पहले पौधों की निचली पत्तियों के किनारे पर भूरे से रंग के अनियमित गीले या जलासिक्त धब्बे बनना शुरू होते है जो मौसम की अनुकूलता पाकर तेजी से फैलता है तथा कुछ ही दिनों में पत्तिया झुलस कर गिरने लगती है । रोगजनक पत्तियों के अथवा शाखाओं तनों व फलों पर भी आक्रमण करता है । फलों पर जैतूनी रंग के धब्बे बनते है जो बढ़कर पूरे फल पर फैल जाते है जिस कारण फल भी फटने लगते हैं ।

रोगजनक : – फाइटोफ्थोरा इन्फेस्टेंन्स

रोगचक्र एवं अनुकूल वातावरण :

रोगजनक पौधों में अवशेषों के साथ भूमि में पड़ा रहता है किंतु तापमान यदि 38 डिग्री से अधिक हो तो यह जीवित नही रह सकते | टमाटर की लगातार दो फसल होने के कारण संक्रमण की ज्यादा संम्भावना होती है अथवा संक्रमित फलों से बीज की बुवाई करने पर अनुकूल वातावरण में बीज से निकले प्ररोहों पर आक्रमण करता है द्वितीय संक्रमण टमाटर के संक्रमित पौधो द्वारा ही होता है ।

  • रोग पर नियंत्रण

१:- बीज उपचार करने के उपरांत बीजों को बोया जाना चाहिए ।

२:- बुवाई ३-४ सप्ताह उपरांत फ़ंगल गॉर्ड और सॉल फ़ंगल गॉर्ड 2ml/litter की दर से स्प्रे करने से रोग नियंत्रित होता है ।

३:- बुवाई समय से कर लेनी चाहिए ।

उपरोक्त दोनो रोग के उपचार होने के उपरांत PGR No1 + PGR No2 की 250 ml व magical grow की १०० ग्राम मात्रा प्रति एकड़ प्रयोग करने से पौधा स्वस्थ और उत्पादन अधिक होता है ।

हमें उम्मीद है यह पोस्ट आपके लिए महत्वपूर्ण साबित होगी। अगर आपको यह जानकारी पसंद आई है तो इसे अन्य किसानों के साथ साझा भी करें। जिससे अधिक से अधिक किसान भाई अपनी टमाटर की फसल को अगेती झुलसा रोग एवं पछेती झुलसा रोग से बचा सकें। टमाटर की खेती से जुड़े अपने सवाल हमसे कमेंट के माध्यम से पूछें। और अधिक जानकारी के लिए हमारे कृषि विशेषज्ञ से सम्पर्क कर सकते है

विश्वजीत शर्मा, एमएससी एग्रीकल्चर

एग्रीकल्चर डेस्क
द इंडियन ओपिनियन

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