पुत्रो की दीर्घायु के लिए माताओं ने रखा हलछठ व्रत! जानिए क्या है पौराणिक मान्यताएं?

◆देश भर में मनायी गयी भगवान बलराम जयंती
◆षष्ठी को बलराम जयंती व अष्टमी को मनायी जाती है कृष्ण जन्माष्टमी
◆पुत्र की दीर्घायु के लिए माताएं रखती है व्रत, की जाती है पूजा अर्चना

देश भर में भगवान कृष्ण के बड़े भाई बलराम जयंती मनायी जा रही है। सनातन धर्मियों में भाद्रपद का महीना पर्व व त्योहार के लिहाज से बहुत ही महत्वपूर्ण होता है। भादो मास के षष्ठी तिथि को बलराम जी और अष्टमी तिथि को श्री कृष्ण का जन्म हुआ था। बलराम जयंती के दिन अर्थात षष्ठी तिथि को महिलाएं अपने पुत्रों की दीर्घायु और सुखी जीवन के लिए व्रत रखती हैं और उनकी पूजा करती हैं।

इस बार बलराम जयंती अगस्त माह की 28 तारीख को मनायी गयी, इसमे महिलाएं गाय के गोबर से हलछठ का निर्माण कर विधिवत पूजन अर्चन करती है एवं प्रसाद के रूप में दही एवं लाल चावल दिया जाता है एवं माताएं भी इसी प्रसाद को ग्रहण करती है। 

हलछठ यानी बलराम जयंती की पौराणिक कथाओं की यदि बात करे तो भागवत पुराण के अनुसार बलराम या संकर्षण को भगवान विष्णु का शेषावतार माना जाता है, धार्मिक मान्यता है कि भगवान विष्णु के अंश माने जाने वाले शेषनाग भगवान विष्णु के हर अवतार में वे उनके साथ धरती पर अवश्य आते हैं। भगवान विष्णु ने अपने आठवे अवतार में भगवान श्रीकृष्ण के रूप में जन्म लिया था। इसी समय में शेषनाग ने श्रीकृष्ण के बड़े भाई बलराम के रूप में अवतार लिया था।

पौराणिक कथा के अनुसार, कंस जब अपनी बहन देवकी को पति वासुदेव के साथ विदा कर रहा था तो उस समय आकाशवाणी हुई कि हे कंस तुम, देवकी और वासुदेव की आठवीं संतान के द्वारा मरे जाओगे इस लिए कंस ने बहन देवकी और वासुदेव को कारागार में बंद कर दिया।

कंस ने देवकी की 6 संतानों को एक-एक कर के मार दिया, सातवीं संतान के रूप में शेषनाग ने बलराम के रूप में गर्भ में स्थापित हुए परंतु भगवान श्री हरि की योग माया से इन्हें रोहिणी की गर्भ में स्थानांतरित कर दिया। इस प्रकार उनका जन्म भगवान श्री कृष्ण के बड़े भाई के रूप में नंद बाबा के यहां हुआ। बलराम मल्लयुद्ध, कुश्ती और गदायुद्ध में पारंगत थे।

बलराम हल धारण करते थे इसलिए उन्हे हलधर भी कहा जाता है और उनकी जयंती को देश भर में हिन्दू धर्म के लोग हल छठ के रूप में मनाते है, पूजन अर्चन के बाद माताएं प्रसाद वितरण करती है एवं पुत्र माताओं के आशीर्वाद प्राप्त करते है।

रिपोर्ट- नितेश मिश्रा

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