बसपा द्वारा कानपुर में आयोजित किया गया “ब्राह्मण सम्मेलन”।

महासचिव सतीश चंद्र मिश्रा ने कहा, जिस दिन प्रदेश में भाजपा की सरकार बनी, उसी दिन गोरखपुर में ब्राह्मणों पर अत्याचार शुरू हुआ। रायबरेली में एक साथ पांच ब्राह्मणों की हत्या कर दी गई। ब्राह्मण वकीलों की हत्या की गई। कानपुर में फिल्मी स्टाइल में बिकरू कांड में गाड़ी पलटा कर ब्राह्मण मार डाले गए। 50 लोगों को जेल में डालकर सड़ाया जा रहा है। दो दिन की शादीशुदा खुशी दुबे को जेल भेजा गया।
बसपा महासचिव ने अयोध्या, मथुरा और बनारस के बहाने सरकार को घेरा। कहा, अयोध्या में विकास के नाम पर हजारों करोड़ का हिसाब लिया जाएगा। बसपा की सरकार में इनको सबका हिसाब देना होगा। इसी चंदाखोरी से यह 2022 के चुनाव लड़ेंगे। इन्होंने मंदिर बनाने के नाम पर ढोंग किया है। 5 अगस्त 2020 को इन्होंने कहा था कि जिसमे भूमि पूजन के नाम पर 200 करोड़ का खर्च कर दिया। अभी तक मंदिर के निर्माण में नींव खोदने का काम नही शुरू हुआ है।
भाजपा के लोग धर्म के नाम पर सिर्फ और सिर्फ अधर्म का काम कर रहे हैं। आप सभी वृंदावन जाइये, वहां जो कार्य बसपा ने किया था, वही काम आज तक हुआ है। 550 करोड़ का कार्य किया गया था। सीवर लाइन डलवाई थी। वृंदावन में 100 बेड का अस्पताल बनवाया।
बनारस में भी आज तक सुधार के नाम पर कुछ नहीं हुआ है। बसपा के समय हुए काम को भी ये बरकार नहीं रखे, रखरखाव का कार्य नहीं कर पाए। बनारस में प्राण प्रतिष्ठा से स्थापित मूर्तियों को हटाने का कार्य किया गया।
बनारस में मां गंगा के चंद्राकार को बदल दिया है। इसी तरह चित्रकूट धाम भी दुर्दशाग्रस्त है, जहां 11 वर्ष से अधिक भगवान राम रहे। भाजपा ने तीर्थ स्थलों को पर्यटक स्थलों में बदलने का काम किया है।


15 सौ संस्कृत विद्यालयों के बजट को खत्म कर दिया। यदि संस्कृत विद्यालय खत्म होंगे तो हमारी संस्कृति खत्म हो जाएगी। सनातन धर्म खत्म हो जाएगा। इनकी योजना है कि जहां-जहां ब्राह्मण पूजा करते हैं, उन मंदिरों का अधिग्रहण किया जाए। योजना बनाकर ब्राह्मण पुजारियों को मंदिरों से हटाकर गोरखपुर मठ के पुजारियों को स्थापित किया जा रहा है। गोरखपुर मठ में ना चोटी रखी जाती है, और ना ही जनेऊ पहना जाता है। वहां के गर्भ गृह में ब्राह्मणों का प्रवेश वर्जित है।
सीएम योगी ने अध्यापकों को पापी कहा है। उनकी यह सोच है। भाजपा महिलाओं को अपमानित करने वालों की पार्टी है। हर दो घंटे में यूपी में एक महिला के साथ बलात्कार हो रहा है। यह राम का नाम भी हमलावर की तरह लेते है। इसी लिए यह सीता राम नहीं कहते हैं।
आमदनी दोगुना बोलकर भाजपा अब जमीन हड़पना चाहती है। ये तीन काले कानून लेकर आ गए हैं। तीन चार उद्योगपतियों के हाथों सारे सरकारी उपक्रम को बेचने में लग गए हैं। उत्तर प्रदेश और हरियाणा बॉर्डर पर किसानों को कुचलने का कार्य किया जा रहा है। यह दमनकारी सरकार है।
राष्ट्रीय महासचिव सतीश चंद्र मिश्र ने कहा कि भाजपा धर्म के नाम पर केवल तमाशा करती है। ये लोग काम और विकास के नाम पर देश और धर्म की बात करते हैं। मैं रोज भगवान की पूजा करता हूं। मेरे अयोध्या जाने पर इनको इतना एतराज क्यों हैं। बसपा धर्म के नाम वोट और नोट नहीं मांगती हैं। बसपा के कार्यकाल में 2007 से लेकर 2012 तक सभी धार्मिक स्थलों का विकास हुआ था।
कानपुर के राजनीतिक इतिहास को यदि देखा जाये तो 2007 में बसपा की पूर्ण बहुमत वाली सरकार में भी यहां सफलता नहीं मिली थी। एक बार फिर से चुनावी वर्ष है। सबसे ज्यादा ब्राह्मण वोटर कानपुर में है। वर्ष 2007 के विधानसभा चुनाव की बात करे तो बसपा ने सोशल इंजीनियरिंग की दम पर पूर्व बहुमत की सरकार बनाई थी। कानपुर देहात और नगर दोनों जिलों को मिलाकर कुल 14 सीटें है। जिनमें से बसपा के खाते में एक भी सीट नहीं है। 14 में से 11 सीटों पर भाजपा काबिज़ है। जबकि सपा के खाते में सिर्फ दो सीटें है, वही कांग्रेस के पास एक सीट है।

बसपा की तरफ से शनिवार को कानपुर में आयोजित प्रबुद्ध सम्मेलन उर्फ ब्राह्मण सम्मेलन में महासचिव सतीश चंद मिश्रा के बेटे कपिल मिश्रा ने मायावती को बुआ कहकर वोट मांगा। उन्होंने कहा कि मुझे किसी पद की जरूरत नहीं है। मेरे लिए यही बहुत है कि मैं सतीश चंद्र मिश्र का बेटा हूं और मायावती का भतीजा हूं। मेरे परिवार और मुझको 20 साल से बहन मायावती का प्यार और आशीर्वाद मिला है।
कपिल ने आरक्षण के बहाने भाजपा सरकार पर हमला भी बोला। उन्होंने कहा, ‘भाजपा सरकार ने सबकुछ प्राइवेट हाथों में बेच दिया है। जब ये गवर्नमेंट यूनिट्स नहीं रहेगी तो फिर क्या आरक्षण और क्या नौकरियां, ये आप भलीभांति आप समझ सकते हैं। ये सिर्फ ढोंग और दिखावा करते हैं’।
यूपी में 23 जुलाई को अयोध्या से प्रबुद्ध सम्मेलन की शुरुआत की गई थी। सम्मेलन को शुरू करने से पहले वहां राम जन्मभूमि और हनुमान गढ़ी में आशीर्वाद लिया था।

रिपोर्ट – आर डी अवस्थी

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