सावधान ! कहीं आप भी तो नहीं हो रहे हैं ओला कम्पनी द्वारा की जा रही धोखाधड़ी का शिकार

आज ओला कैब्स ने शहरों के अन्दर और शहर के बाहर की यात्रा को बहुत सुगम बना दिया है। आपको कहीं जाना है तो अपने मोबाइल पर कैब बुक कीजिये और पहुँच जाइये अपने गन्तव्य पर। आज इन कैब्स के बिना तो जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती। इसलिए इन कैब्स के संचालन और भुगतान में पूरी पारदर्शिता हो यह बहुत ज़रूरी है ।

गत 31मार्च 2022 को छोटी लाइन कैब वे से नई दिल्ली की यात्रा करनी थी तो ओला कैब बुक कर ली। कैब के आने पर सामान रक्खा , ड्राइवर को ओ टी पी बताया और हमारी यात्रा शुरू।

धोखाधड़ी का साक्षात प्रमाण

चारबाग के रास्ते में हमारी कैब को न तो कहीं रोका गया और न ही कहीं कोई टोल वसूला गया। चारबाग कैब वे में प्रवेश करते ही 60 रूपये पार्किंग फीस की माँग ड्राइवर द्वारा की गई। मैंने कहा तुम दो, यह तो इस राइड के बिल में जुड़ी रहती है। पहले तो उसने बहस की और फिर खुशामद करने लगा कि साहब मैं तो ड्राइवर हूँ मुझे तो मालिक को इनवॉइस का पूरा मूल्य भुगतान करना होता है। खैर मैंने पार्किंग का 60 रुपये भुगतान कर दिया और अपने कोच के सामने कैब रुकवा ली। बिल का भुगतान करते समय मैंने ड्राइवर को इस यात्रा का बिल अपने फ़ोन पर खोल कर दिखाया। इस बिल में दो टोल और एक पार्किंग का मूल्य 120 रुपये सम्मिलित थे , फिर भी उसने मुझसे 60 रुपये अतिरिक्त का भुगतान कराया जो सरासर अनुचित था ।

बिल में जिन दो टोल का भुगतान दर्शाया गया था उनका वसूला जाना बहुत पहले ही बन्द हो चुका है परन्तु ओला अवैध रूप से, बिना इस धनराशि का भुगतान किए इसे अपनी यात्रा के बिल में सम्मिलित करती आ रही है । रोज़ाना न जाने कितने यात्री ओला कम्पनी और उसके ड्राइवर्स की इस धोखधड़ी के शिकार होते हैं।

ग्राहकों से आपेक्षित सावधानी

कितने यात्री हैं जो कभी अपनी यात्रा के बिल पर एक नज़र डालने का कष्ट करते है? हम सभी को चाहिए कि यात्रा समाप्त होने पर भुगतान से पहले my rides में जाकर एक बार अपने बिल की जाँच कर लें कि उसमें कोई गलत धनराशि तो सम्मिलित नहीं की गई है । आपकी ज़रा सी लापरवाही इस गलती को बढ़ावा देती है।

ओला कम्पनी द्वारा आपेक्षित सुधार

इस धोखाधड़ी को रोकने का एक सीधा सा समाधान है कि ओला कम्पनी अपने अनुमानित यात्रा बिलों में टोल और पार्किंग की राशि सम्मिलित न करे और सिर्फ इतना लिख दे कि ” टोल और पार्किंग का अतिरिक्त भुगतान ग्राहक द्वारा किया जाएगा”।

सम्बंधित अधिकारी ओला कम्पनी द्वारा राजकीय राजस्व के नाम पर की जा रही इस लूट का संज्ञान लेते हुए इसे तत्काल बन्द कराने के लिए आवश्यक कार्यवाही करें ।

रिपोर्ट – विकास चन्द्र अग्रवाल, द इण्डियन ओपिनियन

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