बंग-भंग! हिंदू मुस्लिम विभाजन/पाकिस्तान निर्माण की अंग्रेजी योजना जिसे “वंदेमातरम”ने कर दिया था पराजित!

आज ही के दिन 115 साल पहले 1905 में बंगाल विभाजन प्रभावी हुआ था। ये वो दौर था जब अंग्रेजी हुक़ूमत से तंग आकर भारतीय जनमानस में आज़ादी की लहर दौड़ रही थी और राष्ट्रीय आंदोलन भी अपने चरमोत्कर्ष की तरफ अग्रसर हो रहा था कि तभी अंग्रेज गवर्नर लॉर्ड कर्ज़न को एक युक्ति सूझी और उसनें भारतीय जनता को अलग-अलग बांटने का काम किया। ऐसा इसलिए किया गया ताकि आजादी की लड़ाई को अब तक भारत की जनता लड़ रही थी जिसे कर्ज़न नें हिन्दू-मुस्लिम बना दिया।

बंगाल का विभाजन यह कहकर किया गया कि इतने बड़े राज्य का प्रशासन चलानें में असुविधा हो रही है और जो सबसे कुटिलता का काम हुआ वो यह था कि अंग्रेजों ने मुस्लिम जनता को उनका फायदा बताकर विभाजन के लिए तैयार कर लिया गया, हालाँकि इस विभाजन को सिर्फ कुछ मुठ्ठी भर मुस्लिमों का ही समर्थन प्राप्त था। 20 जुलाई 1905 को भारी विरोध के बावजूद बंगाल विभाजन के प्रस्ताव पर भारत सचिव नें अपनी मोहर लगा दी।
बंगाल को उस समय भारत में राष्ट्रीय चेतना का केंद्र बिंदु माना जाता था और इस विभाजन का उद्देश्य इसी राजनीतिक जागृति को कुचलना था।

वंगभंग का उद्देश्य प्रशासन की सुविधा उत्पन्न करना कदापि नहीं था बल्कि इसके दो स्पष्ट उद्देश्य थे, एक हिंदू मुसलमान को लड़ाना और दूसरे नवजाग्रत बंगाल को चोट पहुंचाना। यदि गहराई से देखा जाए तो यहीं से पाकिस्तान का बीजारोपण भी हुआ। मुस्लिम लीग के 1906 के अधिवेशन में जो प्रस्ताव पास हुए उनमें से एक यह भी था कि वंगभंग मुसलमानों के लिए अच्छा है और जो लोग इसके विरुद्ध आंदोलन करते हैं वे गलत काम करते हैं और वे मुसलमानों को नुक्सान पहुंचाते हैं। आगे चलकर मुस्लिम लीग के 1908 के अधिवेशन में भी यह प्रस्ताव पारित हुआ कि कांग्रेस ने वंगभंग के विरोध का जो प्रस्ताव रखा है, वह स्वीकृति के योग्य नहीं।


●बंगाल विभाजन के विरुद्ध आंदोलन (वंगभंग आंदोलन)
बंगाल विभाजन के विरुद्ध बंगाल के बाहर भी बहुत आंदोलन हुए। इस आंदोलन में देश के प्रसिद्ध कवियों और साहित्यकारों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस आंदोलन ने बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय के ‘वंदे मातरम्’ गीत को नई बुलंदियाँ प्रदान की। बंगाल को बांटने का जो अंग्रेजी कुचक्र था उसको देश में असाधारण ख्याति तो मिली ही साथ ही जर्मन और कनाडा जैसे देश भी इससे प्रभावित हुए। कामातागरु नामक जहाज के झंडे पर ‘वन्दे मातरम्’ अंकित किया गया था तब से 1930 के नमक सत्याग्रह और सन् 1942 के ‘भारत छोड़ो’ आन्दोलन तक सभी सम्प्रदायों से उभरे युवा स्वतंत्रता संग्राम सैनिकों का सबसे प्रेरक और प्रिय नारा रहा ‘वन्दे मातरम्’। भारत वासियों की अन्तर्भावना इसे नैतिक आधार पर भली प्रकार स्वीकार कर चुकी थी।
●बंगाल विभाजन से भारतीय एकता पहले से ज्यादा सुदृढ हो गई
बेशक अंग्रेजों को लग रहा था कि भारत में यदि राज करना है तो हिन्दू और मुस्लिम जनता को आपस में लड़ाना होगा लेकिन ये उनकी बहुत बड़ी भूल साबित हुई। बंगाल विभाजन से भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन कमजोर पड़ रहा था और चारो तरफ इस विभाजन की आलोचना हो रही थी 1911 में अंग्रेजी हुक़ूमत को आखिरकार भारतीय जनता के सामनें झुकना पड़ा और 12 दिसंबर 1911 के दिल्ली दरबार में बंगाल विभाजन रद्द करना पड़ा। इस दिन गुलाम भारत की राजधानी भी कलकत्ता से दिल्ली स्थानांतरित कर दी गई।

-अराधना शुक्ला

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