मधुमेह बीमारी का फैलता जाल, डायबिटीज रिवर्सल/मैनेजमेंट प्रोग्राम की भूमिका.. पढ़िये एक अनुभव

भारत को मधुमेह की दुनिया की राजधानी माना जाता है। देश में मधुमेह की आबादी 2025 तक 69.9 मिलियन और 2030 तक 80 मिलियन के खतरनाक स्तर को छूने के करीब है। संसार भर के कुल मधुमेह रोगियों में हर छठवां इन्सान भारतीय है।

डायबिटीज ना हो इसके लिए पहल की कमी:
अगर देखा जाए तो भारत में इस बीमारी के बारे में जागरूकता और सही इलाज का अभी भी अभाव है । बीमारी हो जाने पर उसका इलाज तो मिल जाता है परन्तु यह बीमारी हो ही नहीं इस सम्बंध में कोई बात करता ही नहीं ।एक बात और बहुत जोर देकर कही जाती है कि Once a diabetic is always a diabetic.

डायबिटीज नियंत्रण के नाम पर करोड़ों का व्यापार:

अभी पिछले कुछ समय से सोशल मीडिया पर ऐसे विज्ञापनों की बाढ़ सी आ गयी है जो यह दावा करते हैं कि उनके प्रोग्राम से मधुमेह की बीमारी रिवर्स हो जाएगी और इस रोग के मरीज बिना इन्सुलिन की सुईयों की चुभन और बीमारी में दी जाने वाली दवाइयों के दुष्प्रभाव से मुक्त होकर सामान्य जीवन व्यतीत कर सकेंगे। एक यक्ष प्रश्न जो अब दिमाग में आता है कि क्या इस तरह के विज्ञापनों में किये गए दावे सच हो सकते हैं ? तरीका सिर्फ एक था कि इस प्रकार के किसी भी प्रोग्राम की सदस्यता ली जाए और परिणामों को खुद महसूस किया जाए । इस तरह के बहुत से डायबिटीज रिवर्सल/मैनेजमेंट प्रोग्राम इस समय उपलब्ध हैं। इस लेख का उद्देश्य किसी एक प्रोग्राम की प्रमाणिकता साबित करना नहीं है । सभी प्रोग्रामों मैं अपनी अपनी खूबियाँ हो सकती हैं ।

एलोपैथी के पारंपरिक इलाज में कई जटिलताएं:

कुछ सोच विचार के मैंने Breath Well Being नाम के प्रोग्राम को जॉइन कर लिया । इस प्रोग्राम से जुड़ने से पहले मेरा शुगर स्तर अनियंत्रित रहता था । मैं 38 यूनिट इन्सुलिन के अतिरिक्त 3 और दवाईयां लेता था । मैं पिछले 27 वर्षों से अधिक से डायबिटीज का मरीज था । इस बीमारी के दुष्प्रभाव मेरी आँखों, किडनी और हाथ पैरों को प्रभावित करने लगे हैं । कई जगह दिखाया परन्तु आराम नही मिला । इंडोक्रोनोलॉजिस्ट सिर्फ शुगर और थाइरॉइड की दवा देने की बात करते थे और किडनी और न्यूरो वाले डॉक्टर अपनी बीमारियों की । मुझे किसी ऐसे डॉक्टर की तलाश थी जो मेरे पूरे शरीर को एक माने, उस को अगल अलग अंग नहीं। उसी तलाश में डॉक्टर तो नहीं इस प्रोग्राम पर निगाह पड़ गयी।

गत 26 जुलाई को इस प्रोग्राम के अनुसार डाइट लेना और दैनिक दिनचर्या को व्यवस्थित करना शुरू किया। डाइट में कुछ चीजों का प्रतिबंध था , कुछ को नियंत्रित किया गया था और कुछ को सम्मिलित किया गया था। सम्मिलित की हुई वस्तुएँ या तो मेरे किचन में उपलब्ध थीं या पास के मार्केट में।

खानपान में नियंत्रण और अनुशासन से डायबिटीज पर विजय हासिल करना संभव:

तीसरे दिन से जो कुछ होना शुरू हुआ वह किसी चमत्कार से कम नहीं था। मेरा फास्टिंग शुगर लेवल सौ से कम हो गया था । नाश्ते और दोपहर के भोजन के बाद के पी पी शुगर लेवल भी निर्धारित मापदंडों के अनुरूप थे । चौथे रोज़ से मेरा फास्टिंग शुगर लेवल इतना कम होना शुरू हो गया कि मुझे पिछले 11 दिनों में धीरे धीरे इन्सुलिन की मात्रा को दस यूनिट से घटाना पड़ा तथा रात के खाने के बाद ली जाने वाली शुगर की एक दवा को बन्द करना पड़ा। मेरे बाएँ हाथ की समस्या में काफी सुधार है और मेरा वजन लगभग दो किलो कम हो गया है।

मुझे नहीं पता कि आगे क्या होगा? परन्तु एक आशा की किरण अवश्य दिखाई दे रही है कि शायद यह प्रोग्राम मुझे इन्सुलिन पैन की सुईयों की चुभन और दवाइयों के दुष्प्रभाव से भविष्य में मुक्ति दिलवा सके।

निर्णय हमको लेना है कि हमारे लिए क्या ज़रूरी है…. अपनी टेस्ट बड्स को सन्तुष्ट करना या सुईयों की चुभन और ली जाने वाली दवाओं के दुष्प्रभाव से बच एक सामान्य जीवन बिताना।
आखिर ज़िन्दगी है आपकी – निर्णय है आपका

आलेख – विकास चन्द्र अग्रवाल

( डिस्क्लेमर – यह लेख , लेखक का अपना निजी अनुभव है । लेखक या न्यूज़ चैनल न तो इस लेख के माध्यम से किसी प्रोग्राम विशेष को अनुमोदित कर रहे हैं और न ही इस सम्बन्ध में किसी प्रकार के दावे के लिए उत्तरदायी होंगे। पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह इस सम्बन्ध में अपने सोत्रों से सम्पूर्ण जानकारी प्राप्त करने के बाद, संतुष्ट होने पर ,प्राप्त तथ्यों के आधार पर स्वविवेक से इस सम्बन्ध में कोई निर्णय लें।)

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