पंजाब-हरियाणा उच्च न्यायालय ने हरियाणा सरकार से तलब की मोटी तोंद वाले पुलिस कर्मियों की सूची

सुरक्षा सेवाओं से जुड़े कर्मचारियों को पूरी तरह से चुस्त और दुरुस्त होना चाहिए, तभी वे अपनी ज़िम्मेदारी को सही ढंग से अंजाम दे सकते हैं। इसके विपरीत वास्तविकता यह है कि पुलिस बल में मोटी तोंद वाले पुलिसकर्मियों की बहुतायत है।

मुम्बई पुलिस ने उठाए आवश्यक कदम

इसी के मद्दे नज़र गत वर्ष मुम्बई में पुलिसकर्मियों की कार्यकुशलता बढ़ाने के लिए ‘स्वस्थ पुलिस सशक्त पुलिस’ अभियान के अंतर्गत अधिक वजन और मोटी तोंद वाले अनफिट पुलिसकर्मियों की शिनाख्त करके उन्हें मोटापा कम करने का आदेश जारी किया गया तथा इसके लिए शिविर लगाए गए।

हरियाणा का पुलिस विभाग भी जूझ रहा है इस समस्या से

अब मोटे और भारी तोंद वाले पुलिस कर्मियों की समस्या से जूझ रहे हरियाणा का पुलिस प्रशासन प्रश्नों के घेरे में है। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने आबकारी कानून के अंतर्गत हरियाणा में 4664 तथा नशा निरोधक कानून के अंतर्गत दर्ज 1005 एफ.आई.आर. में भागने वाले दोषियों का पीछा करके उनको पकडऩे में मोटापे से ग्रस्त पुलिस कर्मियों के विफल रहने से पैदा समस्या पर सभी वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों से रिपोर्ट मांगने का राज्य के पुलिस महानिदेशक को आदेश दिया है। माननीय न्यायाधीश अरविंद सिंह सांगवान ने उनसे यह बताने को कहा है कि ऐसे पुलिस अधिकारियों को फिट रखने के लिए उन्हें शारीरिक फिटनेस का कितना वास्तविक प्रशिक्षण दिया गया है। इसके साथ ही माननीय न्यायाधीश ने संदिग्ध भगौड़ों को पकडऩे में नाकाम रहने वाले एस.एच.ओ. अथवा जाँच अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई करने के लिए निर्धारित प्रक्रिया बताने तथा ऐसे अधिकारियों के विरुद्ध की गई कार्रवाई का विवरण देने का भी आदेश दिया है।

मोटी तोंदों, भारी वजन और अन्य रोगों से ग्रस्त पुलिसकर्मियों की मौजूदगी लगभग समूचे देश में पाई जा रही है जो उनकी शारीरिक और कार्य निष्पादन क्षमताओं को प्रभावित करती है और जो अपराधियों को पकडऩे में बड़ी बाधा सिद्ध हो रही है। अत: मात्र हरियाणा ही नहीं बल्कि सभी राज्य सरकारों को इस दिशा में प्रभावी कदम उठाने और उन पर अमल करवाने की जरूरत है।

इसराइल से ली जा सकती है सीख

हम इसराइल से सीख सकते हैं, जहां प्रति 2 वर्ष पर सभी नागरिकों के लिए सैन्य प्रशिक्षण, सेना के सदस्यों की हर 6 महीने व पुलिस कर्मियों की हर 2 महीने पर फिटनैस जांच के लिए कैम्प लगाए जाते हैं, ताकि उनके स्वास्थ्य में किसी प्रकार की कमी पाए जाने पर निवारण के लिए आवश्यक कदम उठाए जा सकें, ताकि वे अपनी ड्यूटी का सफलतापूर्वक निर्वाहन कर सकें।

रिपोर्ट – विकास चन्द्र अग्रवाल

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