केंद्र ने जम्मू-कश्मीर में अन्य राज्यों के लोगों को मतदान का अधिकार देने का किया फैसला-

केंद्र ने जम्मू-कश्मीर में अन्य राज्यों के लोगों को मतदान का अधिकार देने का फैसला किया गया है। इसके बाद लश्कर-ए-तैयबा समर्थित आतंकी ग्रुप कश्मीर फाइट ने गैर कश्मीरियों पर हमले तेज करने की धमकी दी है। उन्होंने आतंकी वेबसाइट पर यह धमकी दी है।

मुख्य निर्वाचन अधिकारी हृदेश कुमार ने कहा कि जो गैर कश्मीरी लोग राज्य में रह रहे हैं, वे वोटर लिस्ट में अपना शामिल कराकर वोट डाल सकते हैं। इसके लिए उन्हें निवास प्रमाण पत्र देने की जरूरत नहीं होगी। 2019 के चुनाव में जम्मू-कश्मीर में कुल 78.7 लाख वोटर्स था, लद्दाख के अलग होने से करीब 76.7 लाख वोटर्स है।

आयोग ने कहा कि इस साल केंद्र शासित प्रदेश में 25 लाख नए वोटर जुड़ने की उम्मीद है। इसमें छात्र, मजदूर और अन्य सरकारी कर्मचारी शामिल होंगे। 2019 में अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद नाम जोड़ने की कवायद पहली बार की जा रही है। पोस्ट में कहा गया है कि जब जीतने का बड़ा कारण होता है, तो कैजुएलिटी भी होती हैं। हम में से कोई भी इससे खुश नहीं है, लेकिन यही सच्चाई है। सभी गैर कश्मीरियों को वोट देने के अधिकार के बाद यह सामने आ गया है कि दिल्ली में गंदा खेल खेला जा रहा है।

चुनाव आयोग की घोषणा के बाद विपक्षी पार्टियों ने केंद्र में सत्तारूढ़ भाजपा पर निशाना साधा है। पूर्व CM उमर अब्दुल्ला ने ट्वीट कर कहा- भाजपा चुनाव से पहले डर गई है। इन लोगों को कश्मीर का सपोर्ट नहीं मिलने जा रहा है। एक सरकारी अधिकारी ने बताया कि आर्टिकल 370 के निरस्त होने के बाद, पीपल एक्ट 1950 और 1951 लागू होता है। यह जम्मू-कश्मीर में रहने वाले बाहर के व्यक्ति को केंद्र शासित प्रदेश की मतदाता सूची में पंजीकृत होने की अनुमति देता है।

 

ब्यूरो रिपोर्ट ‘द इंडियन ओपिनियन’

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