देश को आजाद हुए 74 साल हो गए हैं, आइए जानते हैं कैसा रहा आजाद भारत की कामयाबी का ये सफर-

देश को आजाद हुए 74 साल हो गए और भारत अपनी आजादी का अमृत महोत्सव यानी अपने स्वतंत्रता दिवस की 75वीं वर्षगांठ बड़े धूमधाम से मना रहा है। इन 75 सालों में देश में बहुत बड़ा बदलाव आया है। इन 8 दशक की आजादी में हमारे देश ने काफी उतार-चढ़ाव देखा है। हजारों लोगों की शहादत और लंबे संघर्ष के बाद हमारे देश ने 1947 में आजादी हासिल की, हालांकि यह आजादी आसान नहीं रही, हमें बंटवारे का दंश का सामना करना पड़ा. धीरे-धीरे वक्त का पहिया चलता रहा। और देश एक तरह से शून्य से आगे बढ़ते हुए आज दुनिया के शक्तिशाली देशों में शुमार हो गया है।

भारत की उभरती ताकत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है, जब 24 फरवरी को रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन ने यूक्रेन के खिलाफ जंग का ऐलान किया तो पूरी दुनिया अमन चैन की बात करने लगी. सबकी नजरें भारत पर टिक गई थीं। युद्ध शुरू होने के बाद महीनेभर के अंदर कई देशों के विदेश मंत्रियों ने नई दिल्ली का दौरा किया।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की हाल ही में हुई एक बैठक में कोरोना महामारी का हवाला देते हुए जीवन प्रत्याशा में बीते 20 सालों में आए बदलाव की जानकारी साझा की है। आजादी के बाद से अब तक बाल मृत्यु दर और औसत आयु में तो हालात सुधरे हैं। किसी भी देश की आर्थिक हालत कैसी है? उसे जानने का पैमाना है उस देश की जीडीपी यानी ग्रॉस डेमोस्टिक प्रोडक्ट। माना जाता है कि जब अंग्रेज भारत आए थे, तब दुनिया की जीडीपी में भारत की हिस्सेदारी 22% से ज्यादा थी। लेकिन जब 1947 में देश आजाद हुआ तब ये हिस्सेदारी घटकर 3% रह गई। 2020-21 में 134 लाख करोड़ से ज्यादा होने का अनुमान है।

देश आज आजादी के 75 साल पूरे होने पर अमृत महोत्सव मना रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सपना आजादी के 100 साल पूरे होने तक यानी 2047 तक भारत को विश्वगुरु बनाने का है अगले 25 साल देश के लिए बेहद अहम हैं क्योंकि कई तरह की नई चुनौतियां का सामना करते हुए हमें आगे बढ़ना होगा। आज दुनिया महंगाई की मार झेल रही है। लेकिन भारत महंगाई के बावजूद चालू वित्त वर्ष के दौरान दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था वाला देश बनने वाला है।

भारत की अहमियत पिछले कुछ सालों में खासी बढ़ी है। रूस-यूक्रेन जंग के दौरान दुनिया ने इसे बखूबी देखा भारत पिछले साल अगस्त में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का अध्यक्ष भी बना था। तब संयुक्त राष्ट्र में भारत के पूर्व स्थायी प्रतिनिधि सैयद अकबरुद्दीन ने भारत के यूएनएससी की अध्यक्षता मिलने पर कहा था, “75 से ज्यादा सालों में, ये पहली बार है, जब हमारा राजनीतिक नेतृत्व यूएनएससी के किसी कार्यक्रम की अध्यक्षता करेगा।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण कह चुकी हैं कि फिलहाल भारत की आर्थिक वृद्धि में नरमी का सवाल ही नहीं है। वहीं भारत को 2022 और 2023 फाइनेंसियल ईयर में तेज के साथ बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था के रूप देखा जा रहा है।

 

ब्यूरो रिपोर्ट ‘द इंडियन ओपिनियन’

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