जाने अतिक अहमद कि कहानी,जिसके कारण हाईकोर्ट के 10 जजों ने केस की सुनवाई से ही खुद को अलग कर लिया-

यूपी की योगी आदित्यनाथ सरकार ने अतीक पर शिकंजा तेज कर दिया है। अतीक की लगभग 60 करोड़ की 7 संपत्तियां कुर्क की जा चुकी हैं। 13 अन्य प्रॉपर्टी के खिलाफ भी कार्रवाई की तैयारी चल रही है। कभी प्रयागराज में बाहुबली अतीक अहमद का सिक्का चलता था। अतीक अहमद और उनके करीबियों पर लगातार योगी सरकार का बुलडोजर चल रहा है।


सीबीआई पिछले तीन सालों से अतीक अहमद के बड़े बेटे मोहम्मद उमर की तलाश कर रही है। उसने विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए अपना दल से पर्चा भरा। इलाहाबाद हाईकोर्ट में बेल के लिए अप्लाई किया। लेकिन हाईकोर्ट के 10 जजों ने केस की सुनवाई से ही खुद को अलग कर लिया। 11 वें जज सुनवाई के लिए राजी हुए और अतीक अहमद को बेल दे दी गई।


साल 2015 के सितंबर महीने में एक डबल मर्डर हुआ। यह मर्डर मारियाडीह के प्रधान आबिद की चचेरी बहन अल्कमा और ड्राइवर सुरजीत का था। 23 अप्रैल 2019 को सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार को आदेश दिया कि अतीक अहमद को यूपी के बाहर शिफ्ट किया जाए। इसके बाद यूपी सरकार ने 3 जून 2019 को उसे अहमदाबाद की साबरमती जेल में शिफ्ट कराया। अतीक अहमद इस समय गुजरात की साबरमती जेल में बंद है। अतीक भले ही नेता बन गया था लेकिन वो कभी माफिया वाली अपनी छवि से बाहर नहीं आ पाया। सियासत की आड़ में अतीक अपना आपराधिक साम्राज्य और मजबूत करता रहा। यही वजह है कि उसके ऊपर दर्ज अधिकतर मुकदमे विधायक-सांसद रहते हुए दर्ज हुए हैं। लोग कहते हैं कि वो अपने विरोधियों को हर हाल में छोड़ना नहीं चाहता था। जो भी अतीक के खिलाफ सिर उठाने की कोशिश करता वह मारा जाता। समय का चक्र बदला और आज अतीक अहमद का आर्थिक और आपराधिक साम्राज्य लगातार ध्वस्त हो रहा है।

 

ब्यूरो रिपोर्ट ‘द इंडियन ओपिनियन’

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