स्मोकिंग ही नहीं, कुछ दुर्लभ कारणों और आनुवंशिक स्थितियों से भी बढ़ सकता है खतरा

विश्व फेफड़ा कैंसर दिवस (Lung Cancer Day) के अवसर पर विशेषज्ञों ने बताया कि फेफड़ों का कैंसर बच्चों में बहुत दुर्लभ होता है, लेकिन पूरी तरह असंभव नहीं है। आमतौर पर यह बीमारी वयस्कों, विशेषकर धूम्रपान करने वालों में अधिक देखी जाती है। हालांकि, कुछ मामलों में बच्चों में भी फेफड़ों से जुड़े कैंसर या कैंसर जैसी गांठें विकसित हो सकती हैं।

डॉक्टरों के अनुसार, बच्चों में फेफड़ों के कैंसर का कारण आमतौर पर धूम्रपान नहीं होता। इसके पीछे आनुवंशिक (Genetic) बदलाव, जन्मजात असामान्यताएं, कुछ दुर्लभ बीमारियां, लंबे समय तक हानिकारक रसायनों या प्रदूषण के संपर्क में रहना तथा पैसिव स्मोकिंग (दूसरों के धूम्रपान का धुआं) जैसे कारक भूमिका निभा सकते हैं। हालांकि अधिकांश मामलों में सटीक कारण स्पष्ट नहीं होता।

विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि यदि बच्चे को लगातार कई सप्ताह तक खांसी, सांस लेने में तकलीफ, सीने में दर्द, बार-बार फेफड़ों का संक्रमण, खांसी में खून आना या बिना कारण वजन घटना जैसे लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत बाल रोग विशेषज्ञ या फेफड़ा रोग विशेषज्ञ से जांच करानी चाहिए। ये लक्षण अधिकतर अन्य सामान्य बीमारियों के भी हो सकते हैं, इसलिए घबराने के बजाय समय पर चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों को धूम्रपान के धुएं से दूर रखना, स्वच्छ वातावरण, संतुलित आहार और नियमित स्वास्थ्य जांच फेफड़ों को स्वस्थ रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।