mosbetlucky jetmostbetmosbetlucky jetparimatchaviatoraviatoronewin casinomostbet azmosbet1 winlucky jet casino4rabetmostbet aviator login4x bet1win casinopinup login1winlucky jet crash1winpinup kzmostbet casinopinup login1win slotsmostbetpin upmostbet kz1 win1win uzmostbet casino1win4r bet1 win kzlacky jetpin up 777mosbet aviatorpin upmostbetparimatch1 win1 winpin-upmostbet onlinepin-upmostbetpin up az1 win4rabet bd1win aviatorpin up azerbaycan

FDI: भारत ने ₹10 हजार करोड़ के विदेशी निवेश को दी मंजूरी, चीन का हिस्सा सिर्फ ₹1 करोड़

सरकार ने कई निवेश प्रस्तावों को हरी झंडी दी, संवेदनशील देशों के निवेश पर सख्त निगरानी जारी

केंद्र सरकार ने करीब ₹10,000 करोड़ के प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) प्रस्तावों को मंजूरी दे दी है। इन स्वीकृत निवेशों में चीन से जुड़ा निवेश मात्र लगभग ₹1 करोड़ का बताया गया है। यह आंकड़ा दर्शाता है कि भारत अब भी संवेदनशील देशों से आने वाले निवेश प्रस्तावों की गहन जांच और सरकारी स्वीकृति की प्रक्रिया का पालन कर रहा है।

सरकारी सूत्रों के अनुसार, अधिकांश निवेश प्रस्ताव विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग), सेवा क्षेत्र, प्रौद्योगिकी और अन्य प्रमुख उद्योगों से जुड़े हैं। इन निवेशों से नए रोजगार के अवसर पैदा होने, औद्योगिक उत्पादन बढ़ने और देश में पूंजी प्रवाह को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

वर्ष 2020 में लागू किए गए नियमों के तहत भारत से भूमि सीमा साझा करने वाले देशों, विशेषकर चीन, से आने वाले निवेश के लिए सरकारी मंजूरी अनिवार्य है। इसका उद्देश्य राष्ट्रीय सुरक्षा और संवेदनशील क्षेत्रों में निवेश की निगरानी सुनिश्चित करना है। यही वजह है कि चीनी निवेश प्रस्तावों की अलग से विस्तृत समीक्षा की जाती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े पैमाने पर विदेशी निवेश को मंजूरी मिलना भारत में वैश्विक निवेशकों के भरोसे का संकेत है। वहीं, चीन से जुड़े निवेश की बेहद कम हिस्सेदारी यह दर्शाती है कि भारत सुरक्षा और आर्थिक हितों के बीच संतुलन बनाते हुए अपनी निवेश नीति पर आगे बढ़ रहा है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *