पत्रकार ने दावा किया—गलत बयान देने के लिए अधिकारियों ने बनाया मानसिक दबाव; संत समाज में हलचल, जांच की मांग तेज
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजनीति में उस समय हलचल मच गई जब शाहजहांपुर के एक पत्रकार ने गंभीर आरोप लगाया कि उन्हें स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ बयान देने के लिए दबाव बनाया गया। पत्रकार ने कहा कि उनसे जबरन ऐसी बात कहलवाने की कोशिश हुई, जिससे संत को विवादों में घेरा जा सके।
पत्रकार ने मीडिया से बातचीत में दावा किया कि यह मामला केवल एक साधारण बयान का नहीं, बल्कि “संत को बदनाम कर राजनीतिक फायदा उठाने” की कोशिश का हिस्सा है। उन्होंने बताया कि कुछ अधिकारियों ने उनसे संपर्क कर ऐसा बयान देने के लिए कहा, जो पूरी तरह गलत होता। पत्रकार के अनुसार, जब उन्होंने इनकार किया, तो मानसिक दबाव बनाया गया और लगातार फोन कर धमकाने जैसे हालात पैदा हुए।
पत्रकार के इस दावा सामने आते ही संत समुदाय और समर्थकों में रोष फैल गया। कई संतों ने कहा कि यह “साधु-संतों की छवि को खराब करने की साजिश” है। उन्होंने मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
वहीं राजनीतिक गलियारों में इन आरोपों ने सियासी तापमान बढ़ा दिया है। विपक्षी नेताओं ने सरकार पर “संत समाज को दबाने” और “राजनीतिक लाभ के लिए धार्मिक हस्तियों का उपयोग करने” का आरोप लगाया है। दूसरी ओर, सत्ता पक्ष ने कहा कि पत्रकार के दावे की जांच होनी चाहिए, लेकिन बिना तथ्य के राजनीति करना गलत है।
शाहजहांपुर पुलिस और प्रशासन ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए कहा कि आरोपों की जांच की जा रही है और यदि कोई अधिकारी दोषी पाया जाता है तो कार्रवाई निश्चित होगी।
इस विवाद के कारण स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का नाम एक बार फिर राजनीतिक चर्चाओं में आ गया है। कई समर्थकों ने सोशल मीडिया पर पत्रकार के समर्थन में अभियान चलाया है और निष्पक्ष जांच की मांग की है।
