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चीन के खिलाफ चार ताकतवर देशों का समूह “क्वॉड” हुआ सक्रिय, अहम बैठक!

हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन के लगातार बढ़ते प्रभाव को कम करनें के मकसद से क्वाड के विदेश मंत्रियों की बैठक 6-7 अक्टूबर को जापान में होने जा रही है। चतुष्कोणीय गठबंधन देश (क्वाड) के विदेश मंत्री आज जापान की राजधानी टोक्यो में मिलेगें जहाँ इनके बीच अहम कूटनीतिक वार्ता होगी। ‘क्वाड’ नाम के इस चतुर्भुजीय संगठन में हिन्द-प्रशांत क्षेत्र के चार देश भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया शामिल हैं। भारत की तरफ से इस बैठक में विदेश मंत्री एस. जयशंकर, अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो और जापानी विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोतेगी शामिल होंगे। इस बैठक में हिंद प्रशांत क्षेत्र के भीतर शांति, सुरक्षा, स्थिरता और समृद्धि को बढ़ाने के उपायों पर बातचीत होगी।

कोरोना वायरस महामारी की शुरुआत के बाद से जापान द्वारा आयोजित यह पहला मंत्री स्तरीय सम्मेलन होगा।
भारती के विदेश मंत्रालय की तरफ से बताया गया है कि इस बैठक में कोविड महामारी के बाद अंतरराष्‍ट्रीय व्‍यवस्‍था और चुनौतियों से निपटने के समन्वित प्रयासों पर विचार-विमर्श होगा इसके अलावा क्षेत्रीय मुद्दों तथा मुक्‍त और समावेशी हिंद-प्रशांत क्षेत्र के महत्‍व पर भी चर्चा होगी।
क्‍वाड विदेश मंत्रियों की यह दूसरी बैठक होगी। इससे पहले 2019 में क्‍वाड विदेश मंत्रियों की बैठक संयुक्‍त राष्‍ट्र महासभा से इतर हुई थी। विदेश मंत्री एस. जयशंकर क्‍वाड देशों के अन्‍य तीन विदेश मंत्रियों के साथ अलग से भी बैठक करेंगे। अमेरिका-भारत के विदेश और रक्षा मंत्रियों की बैठक भी अगले महीने में होनी है।


चीन की आक्रामकता से निपटने के लिए भारत,अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया ने इस समूह की स्थापना की है। यह संगठन चारों देशों के बीच अनौपचारिक रणनीति वार्ता का एक मंच है। इसका उद्देश्य एशिया प्रशांत क्षेत्र में शांति की स्थापना और शक्ति का संतुलन बनाना है। अब इस मंच से जुड़ने के लिए ताइवान, दक्षिण कोरिया, वियतनाम और न्यूजीलैंड की अपनी रुचि दिखा रहे हैं।
●क्वाड की बैठक के मायनें
क्वाड समूह की बैठक ऐसे समय में हो रही है जब अमेरिका नें चीन पर कोरोना वायरस को फैलाने का आरोप लगाया और अमेरिका की इस मुहीम में दुनिया के तमाम देशों नें उसका साथ भी दिया है। गौरतलब है कि अमेरिका और चीन के बीच पिछले कुछ सालों से व्यापार युद्ध चल रहा है और इसी बीच कोरोना महामारी की शुरुआत भी चीन से हो गई जहाँ अमेरिका द्वारा यह आरोप लगाया गया कि चीन नें ही इस वायरस को फैलाया है।
क्वाड के विदेश मंत्रियों की बैठक ऐसे समय पर भी हो रही है जब दक्षिण चीन सागर में चीन की महत्वाकांक्षाओं के मुद्दों से लेकर हांगकांग में एक नया सुरक्षा कानून लागू करने और दुनिया की दो बड़ी अर्थव्यवस्थाएं अमेरिका और चीन द्वारा कोरोनोवायरस को न संभाल पानें तक पर व्यापक चर्चा हो रही है।
अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोम्पियों नें कहा, “इस बैठक का समय महत्वपूर्ण है, और मुझे खुशी है कि हम इसे ऐसे वक़्त में करने में सक्षम हैं।”
हालांकि चीन नें इस समूह की कड़े शब्दों में आलोचना करते हुए कहा है कि क्वाड उसके विकास को कभी रोक नहीं सकता।
●क्या क्वाड एशिया का नाटो बन सकता है
भारत, जापान, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया इन चारों देशों के बीच संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘मालाबार’ 2007 में हुआ था तब चीन नें इस पर कड़ी आपत्ति जताई थी। इस घटना के बाद से ऑस्ट्रेलिया नें खुद को इस सैन्य अभ्यास से अलग कर लिया था और उसके बाद से बाकी बचे तीन देशों नें युद्धाभ्यास जारी रखा। हालांकि आगे होनें वाले सैन्य अभ्यासो में ऑस्ट्रेलिया शामिल होगा या नहीं इस पर कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी।ऑस्ट्रेलिया के विदेश मंत्रालय की तरफ से साफ़ कर दिया गया है कि क्वाड के विदेश मंत्रियों की बैठक को ‘मालाबार सैन्य अभ्यास’ से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए।
मनीला में 2017 में जब क्वाड समूह की पहली बैठक हुई थी तब सभी सदस्य देशों नें चीन को लेकर अपने अलग-अलग विचार रखे थे जिसे लेकर मीडिया में टिप्पड़ीकारों नें यह कहकर आलोचना की थी कि क्वाड एक कमजोर और लचर समूह है। दरअसल अब समय भी बदल गया है और जिस उद्देश्य को लेकर भी क्वाड की स्थापना की गई थी उसको भी लक्षित करनें का समय आ गया है।
भारत और चीन के बीच पिछले कई महीनों से सीमा विवाद और सैनिक गतिरोध बना हुआ है, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया पहले से ही आर्थिक और व्यापारिक हितों को लेकर चीन से तनाव की स्थिति में हैं और जापान सीमा विवाद को लेकर चीन से ख़फा है। ऐसे में जब चारों ही देशों के मकसद एक हो तो क्वाड समूह का उद्देश्य भी एक हो जाता है फिर चाहे वह सैनिक समूह हो या फिर सामरिक,
चीन के लिए दोनों ही एक जैसे हैं।

-अराधना शुक्ला

-अराधना शुक्ला

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