बाराबंकी: कोरोना के बढ़ते संक्रमण के बीच आयोजित चुनाव प्रक्रिया में लगे प्राथमिक शिक्षकों की बिगड़ती तबियत को लेकर शिक्षकों ने गुहार लगाई है कि सरकार पंचायत चुनाव स्थगित कर दें। कोरोना संक्रमण के कारण पिछले सप्ताह में बेसिक शिक्षा के लगभग सौ से ज्यादा शिक्षक व अधिकारी अपनी जान से हाथ धो चुके है। शिक्षकों में इस कदर गुस्सा है कि यूनाइटेड टीचर्स एसोसिएशन ‘यूटा’ के प्रदेश अध्यक्ष राजेन्द्र सिंह राठौर ने एक अपील जारी कर कहा है कि यदि शिक्षक को अपनी तबीयत जरा-सी भी खराब लग रही है तो चुनाव ड्यूटी पर न जाएं, निलम्बित हो जाये। निलम्बन को बाद में देखा जायेगा, क्योंकि जान बचाना जरूरी है।
यूटा के प्रदेश अध्यक्ष राजेन्द्र सिंह राठौर ने कहा है कि यदि सरकार को हमारी जान की परवाह नही है, तो हमें ये खुद ही आगे आना होगा कि हमारे लिए क्या जरूरी है। शिक्षको से पिछले एक साल से कई तरह के काम लिए जा रहे है, लेकिन अब पंचायत चुनाव में संक्रमण घर तक पहुंच रहा है। पंचायत चुनाव में होने वाले प्रशिक्षणों से वापस लौटे शिक्षकों प्रशिक्षण की भीड़ में कोरोना संक्रमण हो जाने के कारण जान गंवानी पड़ी। प्रदेश सहित देश के कई ऐसे संस्थान बंद कर दिए गये है जहां केवल सीमित लोग ही जाते है। लेकिन पंचायत चुनाव जिसमें ट्रक और ट्रैक्टर से शहरों से भर कर मतदाता लाये जाते है, उन्हें नही टाला जा रहा है। इस तरह गांवों तक कोरोना का संक्रमण बहुत तेजी से फैल रहा है।
यूटा प्रदेश अध्यक्ष द्वारा ‘जान है तो जहान है’ कि तर्ज पर किया गया यह आह्वान शिक्षको में ऑक्सीजन की तरह काम कर रहा है। जिसे एक बड़ी संख्या में शिक्षकों से सराहा। जिसका असर सोशल मीडिया पर भी खूब देखने को मिला। जिलाध्यक्ष आशुतोष कुमार ने बताया प्रदेश नेतृत्व के निर्देशानुसार हम सभी काम कर रहे है। शिक्षको को विश्वास दिलाया कि शिक्षक हित में यूटा निरन्तर उनके साथ रहेगा। चुनाव महत्वपूर्ण है, परन्तु जीवन अतिमहत्वपूर्ण। इसीलिए सबसे पहले जीवन को प्राथमिकता देने का आह्वान है। शिक्षक डरे नही, स्वस्थ रहने पर ही काम करे।
रिपोर्ट- मोहित शुक्ला
