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उत्तराखंड : तीरथ सिंह रावत के इस्तीफे के बाद, पुष्कर सिंह धामी होंगे उत्तराखंण्ड के नए मुख्यमंत्री

उत्तराखंड – तीरथ सिंह रावत के इस्तीफे की वजह संवैधानिक संकट है या फिर उत्तराखंड का नाराज पुरोहित समाज, साधु-संत और उनके भक्तों का गुस्सा…सीधे तौर पर यह कहना मुश्किल है। लेकिन इतना तो साफ है कि त्रिवेंद्र सिंह रावत को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिलाकर तीरथ सिंह रावत को CM बनाने के पीछे यही पुजारी और संत समाज की नाराजगी बड़ी वजह थी। उम्मीद थी कि तीरथ सिंह रावत संत समाज को साध लेंगे। लेकिन 115 दिनों में तीरथ सिंह रावत कोई कमाल नहीं कर पाए। बल्कि उन्होंने विवादित बयान जरूर दिए।लिहाजा अब तीरथ सिंह रावत के इस्तीफे के बाद उत्तराखंड को एक ऐसे CM की जरूरत होगी जो अगले चुनाव में संत समाज और उनके भक्तों को साध सके और चुनाव जिता सके।
अपने नेता की साख बचाने के लिए तीरथ के साथ खड़े लोग कहते हैं कि नवंबर में चुनाव नहीं हो सकता है, इसीलिए उन्हें जाना पड़ा। कहा तो ये भी जा रहा है कि विधानसभा चुनाव एक साल के अंदर होना है ,इसलिए चुनाव आयोग मुख्यमंत्री की कुर्सी बचाने के लिए उपचुनाव नहीं करवा सकता। इन सब के बीच तीरथ का इस्तीफा भाजपा की अंदरुनी लड़ाई के कारण ज्यादा लग रहा है।


उत्तराखंड में तीरथ सिंह रावत के इस्तीफे के बाद पुष्कर सिंह धामी राज्य के 11वें मुख्यमंत्री होंगे। उनके नाम पर शनिवार दोपहर को भाजपा विधायक दल की बैठक में मुहर लगा दी गई। ये बैठक 3 बजे से केंद्रीय पर्यवेक्षक नरेंद्र तोमर और प्रदेश प्रभारी दुष्यंत कुमार गौतम की मौजूदगी में हुई। केंद्रीय पर्यवेक्षक ने मीडिया को बताया कि बैठक में किसी दूसरे नाम की चर्चा नहीं हुई। सिर्फ पुष्कर सिंह धामी का नाम रखा गया और सबकी सहमति से इस पर मुहर लगा दी गई।
इस बार भाजपा ने तमाम अनुभवी विधायकों को दरकिनार करते हुए युवा चेहरे को तवज्जो दी है। संभावना है कि वे आज ही राजभवन सीएम की शपथ लेंगे। नाम की घोषणा होने के बाद पुष्कर सिंह धामी ने कहा, ‘पार्टी ने एक सामान्य कार्यकर्ता, एक भूतपूर्व सैनिक के बेटे को राज्य की सेवा के लिए चुना है। हम लोगों की भलाई के लिए मिलकर काम करेंगे। हम कम समय में लोगों की सेवा करने की चुनौती स्वीकार करते हैं।’

पुष्कर सिंह धामी का जीवन परिचय

पुष्कर सिंह धामी उत्तराखंड में खटीमा विधानसभा से विधायक हैं। पुष्कर सिंह धामी का जन्म 16 सितंबर 1975 को पिथौरागढ के टुण्डी गांव में हुआ था। उनके पिता सैनिक थे। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के बीच सरकारी स्कूलों से प्राथमिक शिक्षा ली। तीन बहनों के बाद घर का अकेला बेटा होने की वजह से परिवार की जिम्मेदारियां उन पर हमेशा बनी रही।
धामी ने मानव संसाधन प्रबंधन और औद्योगिक संबंध में मास्टर्स किया है। वे 1990 से 1999 तक ABVP में अलग-अलग पदों पर काम कर चुके हैं। धामी 2002 से 2008 तक युवा मोर्चा के प्रदेशाध्यक्ष भी रहे हैं। राज्य की भाजपा 2010 से 2012 तक शहरी विकास परिषद के उपाध्यक्ष रहे। वे 2012 में पहली बार विधायक चुने गए थे। उनकी अगुवाई में ही प्रदेश सरकार से स्थानीय युवाओं को 70% आरक्षण राज्य के उद्योगों में दिलाने में सफलता प्राप्त की।

धामी को RSS का करीबी माना जाता है। वे महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी के भी नजदीकी हैं। पुष्कर सिंह धामी के बारे में राजनीतिक जानकारों का कहना है कि यह एक ऐसा नाम है जो हमेशा विवादों से दूर रहा है। पुष्कर सिंह धामी भ्रष्टाचार जैसे मुद्दे पर काफी जोरशोर से आवाज उठाते रहे हैं। युवाओं के बीच पुष्कर सिंह धामी की अच्छी पकड़ मानी जाती है।
राजपूत समुदाय से आने वाले धामी राज्य के तेज तर्रार नेताओं में शुमार हैं। राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए पुष्कर सिंह धामी को सीएम बनाकर जातीय समीकरण भी साधने की कोशिश की गई है। तीरथ सिंह रावत के मुख्यमंत्री बनने के वक्त भी पुष्कर सिंह धामी का नाम रेस में शामिल रहा था। पुष्कर सिंह धामी राज्य के और मुख्यमंत्रियों के मुकाबले युवा हैं। धामी का युवा होना भी उनके मुख्यमंत्री चुने जाने के पक्ष में गया है।
रामनगर में आयोजित भाजपा के तीन दिनी चिंतन शिविर में भाग लेकर मंगलवार शाम को पूर्व मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत देहरादून पहुंचे थे। बुधवार सुबह वह दिल्ली के लिए रवाना हो गए। देर रात ही उनकी राष्ट्रीय अध्यक्ष से मुलाकात करने की सूचना मिली। इसके साथ ही कई तरह की चर्चाओं ने तेजी से जोर पकड़ा। ये बुलावा भी अचानक आया। बुधवार के उनके कई कार्यक्रम उत्तराखंड में लगे थे। उन्हें छोड़कर सीएम को दिल्ली दरबार में उपस्थित थे।

बताया गया कि पार्टी हाईकमान ने उन्हें दिल्ली तलब किया। इस बीच तीरथ सिंह रावत ने उसी रात राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाकात की। वह गृह मंत्री अमित शाह से भी मिले। इसके बाद शुक्रवार दो जुलाई को उत्तराखंड में उपचुनाव कराने को लेकर चुनाव आयोग को पत्र दिया। हालांकि चुनाव आयोग पहले ही कोविड काल में उपचुनाव कराने से मना कर चुका था। चुनाव आयोग को पत्र देने के बाद सूचना आई कि संवैधनिक संकट का हवाला देकर तीरथ ने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष को पत्र लिखकर इस्तीफे की पेशकश की।
इसके बाद तीरथ सिंह रावत देहरादून पहुंचे और रात करीब नौ बजकर 50 मिनट पर उन्होंने सचिवालय में प्रेस कांफ्रेंस की और अपनी उपलब्धियां गिनाई। साथ ही सरकार के आगामी कार्यक्रमों की जानकारी दी। इसके बाद वह देर रात करीब 11 बजकर सात मिनट पर राजभवन पहुंचे और अपना इस्तीफा दिया। इसके बाद पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग के कारण संवैधानिक संकट खड़ा हुआ। इसलिए मैने इस्तीफा देना उचित समझा। उन्होंने केंद्रीय नेतृत्व का धन्यवाद किया।

रिपोर्ट – आर डी अवस्थी

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