माइलेज में 30% तक गिरावट संभव, लेकिन ईंधन आयात पर पड़ेगा असर

भारत अब पेट्रोल में 20% एथेनॉल मिश्रण (E20) के बाद अगले चरण यानी E85 फ्लेक्स-फ्यूल की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रहा है। भारत सरकार का उद्देश्य कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करना और स्वदेशी ईंधन विकल्पों को बढ़ावा देना है।
E85 ईंधन में लगभग 85% एथेनॉल और 15% पेट्रोल होता है, जिसे विशेष फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों में इस्तेमाल किया जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस ईंधन के उपयोग से वाहनों का माइलेज पारंपरिक पेट्रोल के मुकाबले करीब 25-30% तक कम हो सकता है। हालांकि, यह पर्यावरण के लिहाज से अधिक अनुकूल माना जाता है क्योंकि इससे कार्बन उत्सर्जन में कमी आती है।

सरकार का मानना है कि एथेनॉल उत्पादन बढ़ाने से किसानों को भी लाभ मिलेगा, क्योंकि गन्ना और अन्य फसलों से एथेनॉल तैयार किया जाता है। साथ ही, इससे ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी और विदेशी मुद्रा की बचत भी होगी।
हालांकि, इस बदलाव के लिए देश में फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों का नेटवर्क और इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करना एक बड़ी चुनौती है। ऑटोमोबाइल कंपनियां भी धीरे-धीरे इस दिशा में काम कर रही हैं।
कुल मिलाकर, E85 की ओर बढ़ता कदम भारत को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ा परिवर्तन साबित हो सकता है।