होटलों में वातानुकूलित कमरों की बढ़ती मांग से लेकर गर्मी में प्रभावित होती रेल तक,क्या ब्रिटेन का मौसम सचमुच बदल रहा है?

लंदन में गर्मी से परेशान लोगों को अब उन होटलों में भी ठंडक की तलाश करनी पड़ रही है, जहां कभी गर्मी से बचने की ऐसी जरूरत ही नहीं होती थी। जून की भीषण गर्मी के दौरान ब्रिटेन में वातानुकूलन वाले होटल कमरों की खोज तीन गुना बढ़ गई। कुछ होटल संचालकों ने भी बताया कि मेहमान कमरा बुक करने से पहले यह पूछ रहे थे कि उसमें वातानुकूलन है या नहीं।
यह केवल पर्यटकों की असुविधा की कहानी नहीं है। 2026 की गर्मियां ब्रिटेन के इतिहास की सबसे गर्म गर्मियां दर्ज हुई हैं। मौसम विभाग के अनुसार पूरे ब्रिटेन का औसत ग्रीष्म तापमान 16.5 डिग्री सेल्सियस रहा। वैज्ञानिक आकलन के अनुसार मानवजनित जलवायु परिवर्तन ने इस तरह की गर्मी की संभावना लगभग 130 गुना बढ़ा दी है।

गर्मी का असर अब वहां की आधारभूत व्यवस्था पर भी दिखाई दे रहा है। अत्यधिक तापमान में लोहे की रेल पटरियां फैल सकती हैं और लंबे समय तक सूखे से पटरियों के नीचे की मिट्टी सिकुड़कर अस्थिर हो सकती है। इस कारण कई मार्गों पर रेलगाड़ियों की गति कम करनी पड़ी। ब्रिटेन के राष्ट्रीय रेल तंत्र के अनुसार गर्मी में पटरियां हवा के तापमान से लगभग 20 डिग्री तक अधिक गर्म हो सकती हैं।
और यह केवल रेल या पर्यटन का प्रश्न नहीं है। ब्रिटेन की स्वास्थ्य सुरक्षा एजेंसी के अनुसार मई और जून 2026 की दो गर्मी की लहरों में इंग्लैंड में अनुमानतः 2,877 गर्मी से जुड़ी अतिरिक्त मौतें हुईं। जुलाई की बाद की गर्मी इसमें शामिल भी नहीं है।

जिस देश में गर्मी से बचने के लिए पंखा तक सामान्य जीवन का अनिवार्य हिस्सा नहीं था, वहां अब होटल, रेल और स्वास्थ्य व्यवस्था को भी बदलते तापमान के साथ तालमेल बैठाना पड़ रहा है। यह केवल एक असामान्य गर्मी का मौसम है या आने वाले समय की नई सामान्य स्थिति?इस पर अब गंभीरता से विचार करना होगा।
सवाल यह नहीं कि लंदन इस वर्ष इतना गर्म क्यों हुआ। सवाल यह है कि जिस मौसम के लिए पूरी व्यवस्था बनाई गई थी, क्या वह मौसम ही अब बदल रहा है?
रिपोर्ट- विकास चन्द्र अग्रवाल