सीजफायर के लिए ईरान की नई शर्तें—पहले मुआवजा, हमले न करने की गारंटी और विरोधी पत्रकारों पर कार्रवाई की मांग

मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने सीजफायर (युद्धविराम) को लेकर तीन नई शर्तें सामने रखी हैं। ईरानी अधिकारियों का दावा है कि जब तक इन शर्तों को पूरा नहीं किया जाएगा, तब तक किसी भी तरह के युद्धविराम पर सहमति संभव नहीं है।
ईरान की पहली शर्त है कि उसे हुए नुकसान के लिए पहले मुआवजा दिया जाए। हाल ही में हुए हमलों में उसके कई सैन्य और नागरिक ठिकानों को नुकसान पहुंचा है, जिसके लिए वह आर्थिक भरपाई की मांग कर रहा है।
दूसरी बड़ी शर्त यह रखी गई है कि भविष्य में उस पर किसी भी तरह का हमला न करने की ठोस गारंटी दी जाए। ईरान का कहना है कि बिना सुरक्षा की पुख्ता गारंटी के वह सीजफायर पर भरोसा नहीं कर सकता।
तीसरी और सबसे विवादित शर्त में ईरान ने “ईरान विरोधी पत्रकारों” के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। ईरानी पक्ष का आरोप है कि कुछ पत्रकार और मीडिया संस्थान उसके खिलाफ माहौल बना रहे हैं, जिस पर सख्त कदम उठाए जाने चाहिए।
विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान की ये शर्तें वार्ता प्रक्रिया को और जटिल बना सकती हैं। खासकर पत्रकारों पर कार्रवाई की मांग अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर नई बहस छेड़ सकती है।
वहीं, वैश्विक समुदाय की नजर अब इस बात पर टिकी है कि इन शर्तों पर दूसरे पक्ष की क्या प्रतिक्रिया आती है और क्या इससे क्षेत्र में शांति की संभावना बढ़ेगी या तनाव और गहराएगा।