
भारत में चिप बनेंगे, लेकिन क्या प्रतिभा भी तैयार है?
₹1 लाख करोड़ के निवेश और करीब एक लाख रोजगार अवसरों की उम्मीद,लेकिन क्या हमारी शिक्षा और कौशल व्यवस्था इस नई अर्थव्यवस्था के लिए तैयार है?
भारत में सेमीकंडक्टर उद्योग अब केवल एक सपना नहीं रह गया है। Semicon 2.0 के तहत लगभग ₹1 लाख करोड़ की निवेश प्रतिबद्धताएँ सामने आई हैं और सरकार के अनुसार पूरे सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र में करीब एक लाख नए रोजगार अवसर बनने की उम्मीद है। चिप डिजाइन, निर्माण, पैकेजिंग, उपकरण, सामग्री और अनुसंधान,इन सभी क्षेत्रों को साथ विकसित करने की योजना है।
लेकिन इसके साथ एक बड़ा सवाल भी है कि क्या कारखाने लगाने की गति के साथ कुशल मानव संसाधन प्रशिक्षित करने की गति भी उतनी ही तेज है? सरकार के अनुसार पिछले चार वर्षों में लगभग 70,000 डिजाइन इंजीनियरों को प्रशिक्षित किया गया है और अब लक्ष्य डिजाइन से आगे बढ़कर प्रणाली निर्माण और सूक्ष्म विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में कौशल विकसित करना है।

सेमीकंडक्टर उद्योग सामान्य रोजगार वाला क्षेत्र नहीं है। यहाँ इलेक्ट्रॉनिक्स, भौतिक विज्ञान, रसायन, कंप्यूटर तकनीक, स्वचालन और अत्यंत सटीक उत्पादन प्रक्रियाओं की समझ रखने वाले विशेषज्ञों की आवश्यकता होगी। कारखाने और अत्याधुनिक मशीनें खरीदी जा सकती हैं, लेकिन कुशल प्रतिभा तैयार करने में वर्षों लगते हैं। इसके लिए विद्यालय स्तर से विज्ञान और गणित की मजबूत नींव, उच्च शिक्षा में गुणवत्तापूर्ण प्रयोगशालाएँ और उद्योग से जुड़ा व्यावहारिक प्रशिक्षण आवश्यक होगा।
भारत के लिए यह अवसर केवल चिप बनाने तक सीमित नहीं है। इसके आसपास उपकरण निर्माण, अनुसंधान, चिप डिजाइन, परीक्षण, पैकेजिंग, रखरखाव, आपूर्ति-श्रृंखला और इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण जैसे अनेक क्षेत्र विकसित हो सकते हैं। यानी एक चिप फैक्टरी केवल एक कारखाना नहीं, बल्कि रोजगार और ज्ञान की पूरी नई अर्थव्यवस्था का आधार बन सकती है।
भारत की असली सफलता केवल “भारत में बना चिप” नहीं होगी। सफलता तब होगी जब उस चिप की डिजाइन से लेकर निर्माण और उससे जुड़ी तकनीक तक भारतीय प्रतिभा की बड़ी भूमिका हो। सवाल इसलिए केवल यह नहीं है कि हम कितनी बड़ी फैक्ट्रियाँ लगाएंगे बल्कि सवाल यह है कि क्या हम उन फैक्ट्रियों को दुनिया की अगली तकनीकी छलांग का केंद्र बनाने वाली प्रतिभा भी तैयार कर पाएँगे?
रिपोर्ट- विकास चन्द्र अग्रवाल