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कश्मीर के एकमात्र हिंदू सरपंच की निर्मम हत्या, न विरोध प्रदर्शन न कैंडल मार्च!

रिपोर्ट – देवव्रत शर्मा

अल्पसंख्यकों को लेकर भारत में अक्सर सियासत होती है लेकिन जम्मू कश्मीर के अल्पसंख्यकों को पिछले कई दशकों से इस्लामिक आतंकवाद और हिंसा का बेबसी से सामना करना पड़ रहा है और उनके ऊपर हुए अत्याचार भारत की सियासत के लिए बड़ा मुद्दा नहीं है क्योंकि कश्मीर क्षेत्र में अल्पसंख्यक हिंदू और सिख देश में बड़ा वोट बैंक नहीं माने जाते!

कल कश्मीर के अनंतनाग में एकमात्र हिंदू सरपंच अजय पंडिता को इस्लामिक आतंकियों ने गोलियों से भून डाला वह अपने बगीचे से गुजर रहे थे कि अचानक आतंकियों ने पीछे से उन पर कई गोलियां चलाई उन्हें गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया लेकिन उनकी मौत हो गई ।

इसके पहले भी 90 के दशक में कश्मीर में हिंदुओं और सिखों का बड़े पैमाने पर नरसंहार हुआ जिसके चलते करीब 5 लाख हिंदू और सिख परिवारों ने कश्मीर छोड़ छोड़कर देश के अलग-अलग हिस्सों में शरण ली थी।

अजय पंडिता कांग्रेस पार्टी से जुड़े थे और कश्मीर में कांग्रेस के सक्रिय नेताओं में इनकी गिनती होती थी लेकिन उन्होंने हिंदू धर्म नहीं छोड़ा था और इसलिए यह इस्लामी कट्टरपंथियों के निशाने पर थे। हालांकि इनके गांव के हिंदू मुसलमान सब इनसे प्यार करते थे इसीलिए यह अपने इलाके के सरपंच बनाए गए थे।

लेकिन आतंकवादियों के हमदर्द इस्लामी कट्टरपंथियों ने लंबे समय से इनकी हत्या की योजना बनाई थी 2 महीने पहले इन्हें अपने ऊपर हमले का अंदेशा हो गया था इसलिए इन्होंने कश्मीर के स्थानीय पुलिस प्रशासन से अपने लिए सुरक्षा की भी मांग की थी लेकिन कश्मीर के स्थानीय प्रशासन ने एकमात्र हिंदू सरपंच अजय पंडिता को सुरक्षा नहीं दी और आखिरकार वह इस्लामी आतंकवादियों की गोलियों का शिकार हो गए।

इस मामले में कश्मीर की स्थानीय प्रशासन की लापरवाही और संवेदनहीनता खुलकर उजागर हुई है। नरेंद्र मोदी सरकार ने धारा 370 हटाने के बाद कश्मीर में उपराज्यपाल को कमान सौंपी है, लेकिन इस घटना ने यह साफ कर दिया है कि कश्मीर में  मौजूदा उपराज्यपाल अल्पसंख्यकों को सुरक्षा देने में नाकाम साबित हो रहे हैं और एक बार फिर कश्मीर में इस्लामी आतंकवाद सिर उठा रहा है और वहां बचे कुचे हिन्दुओं के लिए भी हालात पहले से भी ज्यादा खतरनाक हो रहे हैं।

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