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मेरठ के हस्तिनापुर का योगी सरकार कराएगी सौंदर्यीकरण।

मेरठ :38 लाख रुपए की लागत से द्रौपदी घाट को संवारा जाएगा, अब महिलाओं के लिए अलग से होगा स्नानघर, पर्यटन के कारोबार को मिलेगा बढ़ावा।
मेरठ के हस्तिनापुर को अब द्रोपदी के श्राप से मुक्ति मिलेगी। इसकी शुरुआत यूपी सरकार ऐतिहासिक द्रोपदी घाट के सौंदर्यीकरण और जीर्णोद्धार से करेगी। घाट पर आने वाली महिलाओं को अब यहां सभी सुविधाएं मिलेंगी। अब लगता है कि महाभारत कालीन ऐतिहासिक धरोहरों की हालत सुधरने लगी है। कैबिनेट मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने हस्तिनापुर को स्वदेश योजना में शामिल किया है। वहीं, प्रदेश मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने द्रोपदी घाट को अपने ड्रीम प्रोजेक्ट में रखा है। 38 लाख रुपए के बजट से घाट को संवारने की कवायद शुरू हो चुकी है। मान्यता है कि इस द्रोपदी घाट में स्वयं द्रोपदी स्नान करती थी।

मेरठ शहर से लगभग 30 किमी दूर बसी कौरव-पांडवों की राजधानी हस्तिनापुर महाभारत की गवाह है। यह विधानसभा सीट होने के साथ बड़ी आबादी का ब्लॉक है, यहां अपनी नगर पंचायत भी है। ऐतिहासिक महत्व के साथ हस्तिनापुर को जैनियों के बड़े धार्मिक स्थल के रूप में भी जाना जाता है।
हस्तिनापुर विधायक दिनेश खटीक के मुताबिक, हस्तिनापुर में घाट का सौंदर्यीकरण होगा तो यहां पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। इससे हस्तिनापुर का विकास भी होगा। नगर पंचायत के चेयरमैन अरुण कुमार कहते हैं कि मई से द्रोपदी घाट पर सौंदर्यीकरण का काम चल रहा है। स्वदेश योजना के तहत यहां 38 लाख रुपए का काम होना है। 16 लाख रुपए आ चुके हैं काम शुरू है। नगर पंचायत के कार्यकारी अधिकारी मुकेश कुमार मिश्रा कहते हैं कि यहां महिलाओं के लिए 2 टॉयलेट, दो कमरे, द्रोपदी घाट के चारों ओर टाइल्स, सोलर लाइट, सबमर्सिबल, घाट का पुननिर्माण का काम होगा।
‘साताफेरी’ मेला है प्रमुख आयोजन घाट की महंत माता वेदमती बताती हैं कि द्रोपदी घाट में हर साल साताफेरी का मेला लगता है। मेले में आसपास के गांवों से लगभग 10 हजार महिलाएं आती हैं। महिलाएं द्रोपदी घाट में स्नान कर 2 किमी. की दूरी तक जौ बोती हैं। जौ बोने को मोतियों के दान के बराबर माना जाता है। जैनियों के रशमेले के बाद हर साल साताफेरी मेला होता है। इस बार कोरोना के कारण मेला नहीं हुआ। मेले में महिलाओं के लिए स्नानघर की समस्या होती है, जो अब नहीं होगी।

स्थानीय निवासियों का मानना है कि द्रोपदी रोजाना घाट पर स्नान कर पूजा करती थीं। एक दिन जब द्रोपदी स्नान करने गई, तभी कुछ दूरी पर ऋषि दुर्वासा भी स्नान कर रहे थे। दुर्वासा नदी के अंदर थे, तो उनका अधोवस्त्र नदी में बह गया। यह देखकर द्रोपदी ने अपनी साड़ी का एक हिस्सा फाड़कर ऋषि के पास भेज दिया। तब ऋषि ने द्रोपदी को वरदान दिया कि उसकी गरिमा कभी प्रभावित नहीं होगी। दुर्वासा के इस आशीर्वाद पर ही भगवान कृष्ण ने द्रोपदी के सम्मान की रक्षा की थी।
पश्चिमी यूपी में महिलाओं के लिए द्रोपदी घाट और यहां बना द्रोपदी मंदिर मनोकामना पूर्ति का स्थल माना जाता है। द्रोपदी घाट के पास शनि मंदिर और कृष्ण मुरारी मंदिर है। द्रोपदी पूजन के बाद यहां कृष्ण पूजन अनिवार्य है। द्रोपदी तालाब में स्नान कर महिलाएं पीपल के नीचे बैठकर पहले मां द्रौपदी की पूजा करती हैं फिर कृष्ण पूजा होती हैं।
केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री प्रह्लाद सिंह पटेल ने हस्तिनापुर भ्रमण के दौरान इस स्थान को स्वदेश दर्शन योजना में शामिल करने का फैसला किया था। स्वदेश योजना में आने के बाद हस्तिनापुर के पौराणिक स्थलों को नई पहचान मिलेगी। यहां पर्यटन भी बढ़ेगा। द्रोपदी घाट का विकास भी इसी योजना में हो रहा है।
बता दें, हस्तिनापुर कभी पांडवों की राजधानी मानी जाती थी। कौरवों और पांडवों के कई महल और मंदिरों के अवशेष यहां मिलते हैं। हस्तिनापुर में ही पांडवों के सबसे बड़े भाई युधिष्ठिर जुए में द्रोपदी सहित अपना सब कुछ हार गए थे। पौराणिक कथा के मुताबिक, गंगा की बाढ़ के कारण यह नगर पूरी तरह से तबाह हो गया था। उसके बाद पांडव हस्तिनापुर को छोड़कर कौशांबी चले गए थे। चीरहरण के समय द्रोपदी ने हस्तिनापुर को श्राप दिया था कि जहां नारी का सम्मान नहीं होता वह जमीन पिछड़ जाती है। उस श्राप का असर आज भी देखने को मिल रहा है।

रिपोर्ट – आर डी अवस्थी

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