कम उत्पादन और स्टॉक रोकने से बढ़ीं कीमतें, इथेनॉल नीति पर उठे सवालों को नकारा

चीनी की बढ़ती कीमतों को लेकर सरकार ने उन दावों को खारिज किया है, जिनमें इसके लिए इथेनॉल उत्पादन को जिम्मेदार बताया जा रहा था। सरकार के मुताबिक, चीनी के दाम बढ़ने की मुख्य वजह इथेनॉल नहीं, बल्कि घरेलू उत्पादन में कमी और बाजार में स्टॉक की उपलब्धता से जुड़ी परिस्थितियां हैं।
सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया है कि गन्ने से इथेनॉल उत्पादन को बढ़ावा देने की नीति का उद्देश्य किसानों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराना और देश की ऊर्जा जरूरतों में वैकल्पिक ईंधन की हिस्सेदारी बढ़ाना है। सरकार का कहना है कि इथेनॉल उत्पादन और चीनी की कीमतों के बीच सीधा संबंध बताकर महंगाई के लिए केवल इथेनॉल नीति को जिम्मेदार ठहराना सही नहीं है।

चीनी बाजार में कीमतों पर असर डालने वाले कई कारक होते हैं। इनमें गन्ने का उत्पादन, चीनी मिलों की रिकवरी, घरेलू मांग, निर्यात-आयात नीति और बाजार में उपलब्ध स्टॉक प्रमुख हैं। सरकार के अनुसार, हाल की तेजी के पीछे कम उत्पादन और कुछ स्तर पर जमाखोरी जैसी गतिविधियां भी जिम्मेदार हो सकती हैं।
कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए सरकार बाजार में चीनी की उपलब्धता और स्टॉक की स्थिति पर नजर रख रही है। जरूरत पड़ने पर उपभोक्ताओं पर बढ़ती कीमतों का असर कम करने के लिए नीतिगत कदम उठाए जा सकते हैं।

इस मुद्दे को लेकर सरकार और उद्योग जगत के बीच इथेनॉल नीति के प्रभाव पर बहस जारी है। हालांकि, सरकार का रुख स्पष्ट है कि मौजूदा महंगाई के लिए इथेनॉल को मुख्य कारण मानना सही नहीं है। आने वाले समय में उत्पादन और बाजार में उपलब्ध स्टॉक की स्थिति चीनी की कीमतों की दिशा तय करेगी।