मायावती की शर्त मानकर भी नहीं बच पाए आकाश आनंद, अशोक सिद्धार्थ के संन्यास के बाद BSP से बाहर
बहुजन समाज पार्टी यानी BSP में आकाश आनंद को लेकर चल रहा विवाद अब एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। कुछ घंटे पहले तक ऐसा लग रहा था कि आकाश आनंद की पार्टी में वापसी का रास्ता खुल सकता है, लेकिन घटनाक्रम ने अचानक दूसरी दिशा ले ली।
दरअसल, BSP सुप्रीमो मायावती ने 9 सितंबर को कहा था कि अगर आकाश आनंद के ससुर और पूर्व राज्यसभा सांसद अशोक सिद्धार्थ राजनीति से पूरी तरह संन्यास ले लेते हैं, तो आकाश को पार्टी में दोबारा महत्वपूर्ण जिम्मेदारी देने पर विचार किया जा सकता है। मायावती ने आरोप लगाया था कि अशोक सिद्धार्थ ने पार्टी और बहुजन आंदोलन से ज्यादा निजी और पारिवारिक हितों को महत्व दिया।
अशोक सिद्धार्थ ने लिया राजनीति से संन्यास
मायावती के बयान के अगले ही दिन अशोक सिद्धार्थ ने राजनीति से संन्यास लेने का ऐलान कर दिया। उन्होंने सोशल मीडिया पर मायावती के प्रति अपनी निष्ठा जताते हुए कहा कि बहुजन मिशन के लिए उनका समर्पण लंबे समय से रहा है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वह आकाश आनंद को गुमराह नहीं कर रहे थे।
ऐसे में राजनीतिक गलियारों में यह माना जा रहा था कि अब आकाश आनंद के लिए BSP में वापसी का रास्ता आसान हो सकता है।
लेकिन कहानी यहां खत्म नहीं हुई।
मायावती ने फिर लिया बड़ा फैसला
अशोक सिद्धार्थ के संन्यास के बाद मायावती ने आकाश आनंद को एक बार फिर BSP से बाहर कर दिया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, मायावती ने उनके रवैये और पार्टी के प्रति उनकी प्रतिबद्धता पर सवाल उठाए। उन्होंने यह भी कहा कि आकाश को पहले ही पार्टी और संगठन में कई मौके दिए जा चुके हैं।
इस फैसले के बाद साफ है कि अशोक सिद्धार्थ का राजनीति से हटना अकेले आकाश आनंद की राजनीतिक वापसी की गारंटी नहीं बन पाया।
आकाश आनंद की राजनीतिक कहानी में बार-बार बदलाव
आकाश आनंद को कभी मायावती के राजनीतिक उत्तराधिकारी के तौर पर देखा गया था। 2023 में उन्हें आधिकारिक तौर पर मायावती का राजनीतिक उत्तराधिकारी घोषित किया गया था और पार्टी संगठन में उन्हें महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां मिली थीं।
हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में उनके राजनीतिक सफर में कई उतार-चढ़ाव देखने को मिले हैं। कभी उन्हें बड़ी जिम्मेदारी दी गई, तो कभी संगठन से दूर किया गया। सितंबर 2026 में भी मायावती ने पहले उन्हें राष्ट्रीय संयोजक की जिम्मेदारी से हटाते हुए कहा था कि उन्हें अभी और राजनीतिक परिपक्वता हासिल करने की जरूरत है।
BSP के लिए आगे क्या?
यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारी शुरू हो चुकी है। BSP के लिए संगठन को मजबूत करना और अपने राजनीतिक आधार को फिर से मजबूत करना बड़ी चुनौती है।
आकाश आनंद को लेकर लगातार बदलते फैसले यह सवाल भी खड़ा करते हैं कि आने वाले समय में BSP की दूसरी पंक्ति का नेतृत्व कौन संभालेगा। वहीं, आकाश के छोटे भाई ईशान आनंद की पार्टी में बढ़ती भूमिका भी चर्चा में है।
फिलहाल इतना जरूर है कि “ससुर के संन्यास के बाद आकाश की वापसी” वाला समीकरण भी बदल चुका है। अशोक सिद्धार्थ ने राजनीति छोड़ दी, लेकिन आकाश आनंद की BSP में वापसी नहीं हो सकी।
अब बड़ा सवाल यही है—क्या आकाश आनंद का राजनीतिक सफर यहीं खत्म हो गया है या आने वाले समय में मायावती एक बार फिर अपना फैसला बदलेंगी?