Modi-Xi Meeting: 7 साल बाद क्या बदलेगा? LAC से लेकर Trade तक कई मुद्दों पर नजर

Written By: The Indian Opinion News Desk
Published By: The Indian Opinion
Published Date: 11 September 2026
Updated Date: 11 September 2026
नई दिल्ली: चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग करीब सात साल बाद भारत आ रहे हैं। वह 12-13 सितंबर को नई दिल्ली में होने वाले BRICS Summit में हिस्सा लेंगे। इसी दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग के बीच द्विपक्षीय बैठक होने की उम्मीद है। यह मुलाकात ऐसे समय हो रही है जब भारत-चीन संबंधों में पिछले कुछ समय से धीरे-धीरे सुधार के संकेत मिले हैं, लेकिन कई बड़े मुद्दे अभी भी बाकी हैं।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि 7 साल बाद मोदी-शी की आमने-सामने बातचीत से भारत-चीन रिश्तों में क्या बदलेगा?
LAC पर सबसे ज्यादा नजर
भारत और चीन के रिश्तों में सीमा विवाद सबसे संवेदनशील मुद्दा रहा है। 2020 के गलवान संघर्ष के बाद दोनों देशों के संबंधों में बड़ा तनाव आया था।
हाल के समय में दोनों पक्षों के बीच सैन्य और राजनयिक स्तर पर बातचीत आगे बढ़ी है। अब मोदी-शी बैठक में LAC पर स्थिरता और सीमा प्रबंधन अहम मुद्दा रह सकता है।
हालांकि, इस बैठक से किसी बड़े सीमा समझौते की उम्मीद करना जल्दबाजी होगी। दोनों देशों के बीच भरोसे की कमी अभी भी एक चुनौती है।
Trade भी बड़ा मुद्दा
भारत और चीन के बीच कारोबार बड़ा है, लेकिन व्यापार असंतुलन भारत की चिंता बना हुआ है।
बैठक में Market Access, Investment और Trade Deficit जैसे मुद्दों पर चर्चा की संभावना है। दोनों देशों के बीच कारोबार सामान्य करने की कोशिशें हो रही हैं, लेकिन कंपनियों को अभी भी regulatory restrictions, visa और investment से जुड़ी कई दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
भारत के लिए चुनौती यह होगी कि चीन के साथ व्यापार बढ़े, लेकिन trade deficit भी नियंत्रण में रहे।
क्या रिश्तों में आएगी नई गर्माहट?
शी जिनपिंग की सात साल बाद भारत यात्रा अपने आप में बड़ा diplomatic signal है। दोनों देशों के बीच flights, visas और high-level communication को लेकर हाल के महीनों में कुछ सकारात्मक कदम देखने को मिले हैं।
लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि भारत-चीन के सभी विवाद खत्म हो गए हैं। सीमा, व्यापार, निवेश और strategic competition जैसे मुद्दे अभी भी मौजूद हैं।
इसलिए इस बैठक का असली महत्व किसी एक बड़े ऐलान से ज्यादा आगे की बातचीत का रास्ता तय करने में हो सकता है।
भारत के लिए क्यों अहम है यह मुलाकात?
BRICS Summit में एक तरफ रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन होंगे और दूसरी तरफ चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग। ऐसे में भारत को एक ही मंच पर दुनिया की बड़ी शक्तियों के साथ अपने हितों पर बातचीत का मौका मिलेगा।
मोदी-शी बैठक में अगर सीमा पर स्थिरता, व्यापार और लोगों के बीच संपर्क को लेकर आगे बढ़ने की सहमति बनती है, तो इससे दोनों देशों के रिश्तों को धीरे-धीरे सामान्य करने में मदद मिल सकती है।
फिलहाल बड़ा सवाल यही है—क्या सात साल बाद की यह मुलाकात सिर्फ कूटनीतिक बातचीत तक सीमित रहेगी या भारत-चीन रिश्तों में एक नई शुरुआत का रास्ता खोलेगी?