UP में 3,000 MW तक Power Shortage क्यों? Coal Crisis से बिजली सप्लाई पर कितना असर

Written By: The Indian Opinion News Desk
Published By: The Indian Opinion
Published Date: 15 September 2026
Updated Date: 15 September 2026
उत्तर प्रदेश में बिजली सप्लाई को लेकर एक बार फिर चिंता बढ़ गई है। राज्य में करीब 2,000 से 3,000 MW तक का power shortfall सामने आया है। इसकी बड़ी वजह कोयले की सप्लाई में disruption, भारी बारिश और कई thermal power units का बंद या कम क्षमता पर चलना बताई जा रही है।
UPPCL के मुताबिक दिन के समय राज्य में बिजली सप्लाई सामान्य रखने की कोशिश की जा रही है, लेकिन शाम और रात के peak hours में demand और available power के बीच gap बढ़ रहा है। इसका असर कुछ ग्रामीण इलाकों और दूसरे क्षेत्रों में limited night-time rostering के रूप में देखने को मिल रहा है।
Coal Crisis की शुरुआत कैसे हुई?
उत्तर प्रदेश के कई thermal power plants बिजली उत्पादन के लिए coal पर निर्भर हैं। इस समय लगातार बारिश और coal-mining areas में waterlogging के कारण कोयले के उत्पादन और transportation दोनों पर असर पड़ा है।
गीला कोयला और कम supply thermal plants तक पहुंचने वाले fuel को प्रभावित कर रहे हैं। इसके चलते कुछ units को कम capacity पर चलाना पड़ा, जबकि कुछ units technical problems और दूसरे कारणों से भी outage में हैं।
देशभर में भी coal stocks पर दबाव देखा जा रहा है। 9 सितंबर तक भारत के लगभग एक-तिहाई coal-fired power plants के पास critically low coal stocks थे।
UP में कितना Power Shortage है?
15 सितंबर की रिपोर्ट के अनुसार उत्तर प्रदेश में power shortage लगभग 2,000–3,000 MW तक पहुंच गई है। हालांकि UPPCL ने सामान्य परिस्थितियों की तुलना में उपलब्धता में करीब 1,500–2,000 MW की कमी बताई है।
यानी अलग-अलग आंकड़े shortage को अलग तरीके से माप रहे हैं, लेकिन इतना साफ है कि राज्य के power supply system पर दबाव बढ़ा है।
सितंबर 2025 में UP की peak supply करीब 30,625 MW तक पहुंची थी, जबकि इस समय UPPCL लगभग 27,000 MW तक supply manage कर पा रहा है।
किन इलाकों में बिजली कटौती का असर?
सबसे ज्यादा दबाव peak evening और night hours में देखने को मिल रहा है। Limited rostering ग्रामीण क्षेत्रों, Bundelkhand, tehsil towns और nagar panchayats में की जा रही है। वहीं district headquarters में 24 घंटे supply बनाए रखने की कोशिश की जा रही है।
इसका मतलब यह नहीं है कि पूरे UP में लगातार बिजली कटौती हो रही है। समस्या मुख्य रूप से उस समय ज्यादा बढ़ रही है जब electricity demand तेजी से बढ़ती है और उपलब्ध generation सीमित हो जाती है।
सिर्फ Coal ही जिम्मेदार नहीं
Power shortage के पीछे केवल coal supply disruption को जिम्मेदार नहीं माना जा सकता।
UP में कई generating units technical problems, maintenance और दूसरे कारणों से भी outage में हैं। 14 सितंबर की UPSLDC रिपोर्ट में करीब 5,340 MW generation capacity short या long-term outage में बताई गई थी।
यानी मौजूदा संकट में तीन चीजें एक साथ असर डाल रही हैं:
- Coal supply में कमी
- भारी बारिश और waterlogging से coal transportation प्रभावित
- कई power generation units का outage
इन तीनों वजहों से available electricity घट रही है।
महंगी बिजली खरीदना भी बनी चुनौती
जब राज्य में खुद का generation पर्याप्त नहीं होता, तो power exchanges से अतिरिक्त बिजली खरीदनी पड़ती है। लेकिन मौजूदा स्थिति में peak hours के दौरान market में उपलब्धता भी सीमित है।
UPPCL के अनुसार 1 सितंबर से power exchange पर ₹10 प्रति यूनिट की ceiling price वाली बिजली औसतन करीब 16 घंटे प्रतिदिन ही उपलब्ध रही है। इससे shortage के समय अतिरिक्त बिजली खरीदना आसान नहीं है।
सरकार क्या कर रही है?
UPPCL ने Coal India और दूसरी संबंधित agencies के साथ coordination बढ़ाया है ताकि coal supply को जल्द सामान्य किया जा सके। अधिकारियों को उपलब्ध सभी sources से electricity procure करने और supply roster को बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं।
वहीं coal supply में सुधार के संकेत भी मिले हैं। Northern Coalfields Limited ने बारिश की स्थिति बेहतर होने के बाद उत्पादन और dispatch बढ़ाया है, जिससे UP समेत कुछ राज्यों के thermal plants को राहत मिलने की उम्मीद है।
आगे क्या होगा?
अगर coal transportation और thermal units की availability जल्द सामान्य होती है, तो UP में power shortage कम हो सकती है। लेकिन अगर बारिश, coal movement और generation outages की समस्या बनी रहती है, तो peak hours में बिजली supply पर दबाव आगे भी जारी रह सकता है।
फिलहाल सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही है कि बढ़ती electricity demand के बीच पर्याप्त generation और coal supply को कैसे बनाए रखा जाए।
निष्कर्ष
उत्तर प्रदेश का मौजूदा बिजली संकट केवल “बिजली की कमी” की कहानी नहीं है। इसके पीछे coal supply, heavy rainfall, transportation disruption, thermal plant outages और peak-hour demand का पूरा chain reaction है।
अच्छी बात यह है कि supply को stabilize करने के लिए coal procurement और additional power purchase पर काम किया जा रहा है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि thermal plants कब पूरी क्षमता से चलना शुरू करते हैं और coal supply कितनी जल्दी normal होती है।