Lucknow में EVM-VVPAT की जांच शुरू: चुनाव से पहले क्या है First-Level Checking?

उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियां तेज हो गई हैं। इसी क्रम में लखनऊ में EVM और VVPAT की First-Level Checking (FLC) को लेकर अधिकारियों की ट्रेनिंग और तैयारियां पूरी की जा रही हैं। 14 सितंबर को लखनऊ में 33 जिलों के जिला निर्वाचन अधिकारियों, उप-जिला निर्वाचन अधिकारियों और FLC supervisors के लिए विशेष workshop आयोजित की गई। इसके साथ ही प्रदेश के सभी 75 जिलों के अधिकारियों की FLC training पूरी हो चुकी है।
लेकिन आखिर First-Level Checking क्या होती है और चुनाव से पहले EVM-VVPAT की इतनी विस्तृत जांच क्यों की जाती है?
क्या है First-Level Checking यानी FLC?
First-Level Checking चुनाव से काफी पहले EVM और VVPAT की तकनीकी और कार्यक्षमता जांच की प्रक्रिया है। Election Commission के अनुसार FLC में मशीनों का physical inspection और functionality test किया जाता है तथा पुराना poll data clear किया जाता है। यह प्रक्रिया मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में की जाती है।
इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि चुनाव में इस्तेमाल होने वाली मशीनें सही तरीके से काम कर रही हों और उनमें किसी तरह की technical समस्या न हो।
EVM में क्या-क्या चेक किया जाएगा?
उत्तर प्रदेश के Chief Electoral Officer Navdeep Rinwa के अनुसार Bharat Electronics Limited (BEL) और Electronics Corporation of India Limited (ECIL) के engineers हर Control Unit, Ballot Unit और VVPAT machine की जांच करेंगे। इसमें buttons, wires, connections और अन्य technical components की functionality देखी जाएगी।
यानी सिर्फ मशीन को switch on करके देखना ही FLC नहीं है, बल्कि इसके अलग-अलग components और voting functionality की विस्तृत जांच की जाती है।
5% EVM पर होगा Mock Poll
FLC की सबसे महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं में से एक mock poll है।
जांच में सही पाई गई मशीनों में से 5% machines को randomly select किया जाएगा। इन पर लगभग 1,200 से 1,500 votes का mock poll कराया जाएगा ताकि यह देखा जा सके कि अलग-अलग candidate buttons दबाने पर vote सही तरीके से record हो रहा है या नहीं।
यह प्रक्रिया असली चुनाव नहीं है। इसका उद्देश्य केवल मशीन की functionality को verify करना है।
Political Parties भी रहेंगी मौजूद
FLC को लेकर transparency पर भी विशेष जोर दिया गया है।
मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को FLC का schedule बताया जाएगा और उन्हें पूरी प्रक्रिया के दौरान मौजूद रहने की अनुमति होगी। वे randomly machines select करके mock poll भी कर सकते हैं।
इसका उद्देश्य यह है कि मशीनों की जांच केवल election officials की internal exercise न रहे, बल्कि राजनीतिक दलों को भी प्रक्रिया को देखने और verify करने का अवसर मिले।
FLC की पूरी प्रक्रिया कितने समय चलेगी?
उत्तर प्रदेश में FLC district headquarters पर आयोजित की जाएगी। अधिकारियों के अनुसार प्रत्येक जिले में यह प्रक्रिया लगभग दो से तीन सप्ताह चल सकती है।
Lucknow workshop में बताया गया कि FLC रोजाना सुबह 10 बजे से शाम 7 बजे तक आयोजित की जाएगी और इसकी monitoring live webcasting के जरिए Election Commission, Chief Electoral Officer office और district officials द्वारा की जाएगी। पूरी प्रक्रिया को अक्टूबर के अंत तक पूरा करने का लक्ष्य बताया गया है।
क्या FLC सिर्फ Lucknow में होगी?
Lucknow में आयोजित workshop में 33 जिलों के अधिकारियों को training दी गई। इससे पहले West UP के 21 जिलों के अधिकारियों की training Gautam Buddha Nagar और East UP के 21 जिलों की training Varanasi में हुई थी। इसके बाद सभी 75 जिलों से जुड़े अधिकारियों की training पूरी हो गई।
यानी Lucknow में हुई workshop पूरे प्रदेश में होने वाली FLC की तैयारी का हिस्सा है।
VVPAT क्यों महत्वपूर्ण है?
VVPAT यानी Voter Verifiable Paper Audit Trail वह व्यवस्था है जिसमें voter को अपने vote की एक paper slip दिखाई देती है। Election Commission के अनुसार vote डालने के बाद संबंधित candidate और symbol वाली slip लगभग 7 seconds तक दिखाई देती है और फिर sealed compartment में चली जाती है।
इसलिए FLC में VVPAT की functionality की जांच भी महत्वपूर्ण होती है, ताकि electronic vote record और generated paper slip के बीच सही correspondence सुनिश्चित किया जा सके।
क्या FLC का मतलब EVM में कोई गड़बड़ी मिली है?
नहीं।
First-Level Checking को EVM में गड़बड़ी मिलने की खबर के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। यह चुनाव से पहले होने वाली standard pre-election checking process है।
Election Commission के अनुसार EVM और VVPAT की FLC हर Assembly या Lok Sabha election से पहले की जाने वाली multi-level checking व्यवस्था का हिस्सा है।
यानी इसका मुख्य उद्देश्य संभावित technical issues को चुनाव से पहले identify करना और मशीनों की readiness सुनिश्चित करना है।
चुनाव से पहले यह प्रक्रिया क्यों जरूरी है?
चुनाव में लाखों मतदाताओं के वोट रिकॉर्ड किए जाते हैं। इसलिए polling शुरू होने से पहले इस्तेमाल होने वाली machines की reliability सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है।
FLC के जरिए:
- मशीनों की physical condition check होती है।
- Buttons और connections की functionality देखी जाती है।
- Voting और counting-related functionality test होती है।
- VVPAT operation verify किया जाता है।
- Random machines पर mock poll होता है।
- Political parties को verification process में शामिल किया जाता है।
- पूरी प्रक्रिया की monitoring की जाती है।
इससे चुनाव के दौरान technical problems की संभावना कम करने में मदद मिलती है।
निष्कर्ष
Lucknow में हुई EVM-VVPAT workshop और पूरे UP में FLC की तैयारी 2027 विधानसभा चुनावों से पहले Election Commission की बड़ी तैयारी का हिस्सा है।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि FLC केवल मशीनों की technical checking नहीं है। इसमें engineers, election officials और recognised political parties के representatives की भागीदारी के जरिए transparency पर भी जोर दिया जा रहा है।
अब नजर इस बात पर रहेगी कि उत्तर प्रदेश के सभी जिलों में FLC प्रक्रिया तय समय के भीतर पूरी होती है या नहीं और चुनाव के लिए तैयार की जाने वाली EVM-VVPAT machines की final verification किस तरह होती है।