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महिला कर्जदारों का ऋण संग्रह 76 लाख करोड़ रुपये पहुंचा, 8 साल में चार गुना बढ़ोतरी

महिलाओं की आर्थिक भागीदारी में बड़ा उछाल, बिजनेस और स्वरोजगार के लिए तेजी से ले रहीं लोन

Reserve Bank of India और वित्तीय संस्थानों से जुड़े हालिया आंकड़ों के अनुसार, देश में महिला कर्जदारों का कुल ऋण संग्रह बढ़कर 76 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। पिछले आठ वर्षों में इसमें लगभग चार गुना वृद्धि दर्ज की गई है, जो महिलाओं की बढ़ती आर्थिक भागीदारी और वित्तीय आत्मनिर्भरता को दर्शाता है।

विशेषज्ञों के मुताबिक, महिलाओं द्वारा लिए जाने वाले लोन में होम लोन, एजुकेशन लोन, बिजनेस लोन और स्वरोजगार से जुड़े ऋणों की हिस्सेदारी तेजी से बढ़ी है। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में महिलाएं अब छोटे व्यवसाय, स्टार्टअप और स्वयं सहायता समूहों के जरिए आर्थिक गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।

बैंकों और माइक्रोफाइनेंस संस्थानों ने भी महिलाओं के लिए विशेष योजनाएं शुरू की हैं, जिससे उन्हें आसानी से ऋण उपलब्ध हो रहा है। वित्तीय जानकारों का मानना है कि महिलाओं की बढ़ती आर्थिक क्षमता देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएगी।

यह आंकड़ा इस बात का संकेत है कि महिलाएं अब सिर्फ घरेलू जिम्मेदारियों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि आर्थिक विकास की मुख्यधारा में तेजी से आगे बढ़ रही हैं।

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