ब्रज में रंगोत्सव की शुरुआत फाल्गुन से पहले, जबकि काशी में गंगा घाटों पर होगी पारंपरिक भांग होली—दोनों शहरों में खास तैयारियाँ तेज

भारत में होली सिर्फ त्योहार नहीं, बल्कि कई रंगों, परंपराओं और अनोखी मान्यताओं का संगम है। खासकर दो शहर—Mathura और Varanasi—होली के दौरान अपने अनोखे रंगों और उत्सवों के लिए दुनिया भर में मशहूर हैं।
Holi 2026 में भी दोनों शहरों में माहौल बेहद खास रहने वाला है।
📍 मथुरा–वृंदावन: लठमार से फूलों की होली तक—ब्रज में रंगोत्सव का अलग ही जादू
ब्रज भूमि में होली की शुरुआत कई दिन पहले ही हो जाती है।
सबसे लोकप्रिय है बरसाने की लठमार होली, जहां महिलाएँ पुरुषों को प्रतीकात्मक रूप से लाठियों से मारती हैं और पुरुष ढाल से बचाव करते हैं। वृंदावन में फूलों की होली, ‘बांके बिहारी’ मंदिर में गुलाल के रंग और मथुरा की शोभायात्राएँ दुनिया भर के भक्तों को आकर्षित करती हैं।
मथुरा-वृंदावन होली 2026 की प्रमुख तिथियाँ:
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लठमार होली (बरसाना): 3 मार्च 2026
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नंदगांव लठमार होली: 4 मार्च 2026
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फूलों की होली (बांके बिहारी मंदिर): 5 मार्च 2026
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मथुरा जलेबी चौक रंगोत्सव: 6 मार्च 2026
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मुख्य होली (धुलेंडी): 7 मार्च 2026
📍 काशी–वाराणसी: घाटों की भांग, ठंडई और देव नगरी की अनूठी रौनक
काशी में होली की पहचान है—भांग, ठंडई, घाटों की रंगत और बाबा विश्वनाथ की नगरी का पारंपरिक उत्सव।
लोग सुबह-सुबह दशाश्वमेध घाट से लेकर अस्सी घाट तक उत्सव में शामिल होते हैं।
वाराणसी की होली में संगीत, निर्गुण भजन और लोकगीतों का अलग ही आनंद होता है।
वाराणसी होली 2026 की प्रमुख तिथियाँ:
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भांग होली (घाटों पर पारंपरिक आयोजन): 6 मार्च 2026
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मुख्य धुलेंडी होली: 7 मार्च 2026
🌈 मथुरा Vs वाराणसी—कहाँ है होली का सबसे अनोखा स्वाद?
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मथुरा का माहौल: धार्मिक परंपरा + राधा-कृष्ण की लीलाओं का रंग
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वाराणसी का माहौल: संगीत, भांग, घाटों की मोहकता और देसी अंदाज़
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टूरिस्ट फुटफॉल: दोनों शहरों में 2026 में भारी संख्या में पर्यटकों के पहुंचने की संभावना
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होटल/ट्रेवल बुकिंग: पहले से ही कई जगह फुल बुकिंग शुरू
दोनों शहर अपनी-अपनी संस्कृति और परंपराओं के कारण होली को पूरी तरह अलग रूप देते हैं। यही वजह है कि हर साल लाखों लोग दोनों जगहों पर होली मनाने पहुंचते हैं।