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नदी के कटान का कहर: जंगल नंबर-3 में 40 घर नदी में समाए, जिंगनिया मजरा के ग्रामीण चारों तरफ पानी से घिरे

धौरहरा/लखीमपुर खीरी: तहसील धौरहरा क्षेत्र में नदी के तेज कटान और लगातार बढ़ते पानी ने कई ग्रामीण परिवारों के सामने गंभीर संकट खड़ा कर दिया है। जंगल नंबर-3 के मजरा चहमलपुर में करीब 40 घर नदी की चपेट में आने की जानकारी सामने आई है, जबकि जिंगनिया मजरा के ग्रामीण चारों तरफ पानी से घिरे होने के कारण मुश्किल परिस्थितियों में फंसे हुए हैं।

स्थिति लगातार गंभीर बनी हुई है और प्रभावित परिवार सुरक्षित स्थानों की तलाश में जुटे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि नदी का कटान तेजी से बढ़ रहा है, जिससे आसपास के अन्य घरों पर भी खतरा मंडरा रहा है।

जंगल नंबर-3 में नदी के कटान से बड़ा नुकसान

धौरहरा तहसील क्षेत्र के जंगल नंबर-3 स्थित मजरा चहमलपुर में नदी का तेज बहाव ग्रामीणों के लिए बड़ी मुसीबत बन गया है। ग्रामीणों के अनुसार, तेज कटान के कारण करीब 40 घर नदी की चपेट में आकर कट गए

घर और जमीन के नुकसान के बाद कई परिवारों के सामने सबसे बड़ी चुनौती रहने के लिए सुरक्षित जगह तलाशने की है। लोग अपने घरों से जरूरी सामान निकालने और उसे सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं।

नदी के किनारे बसे अन्य परिवार भी भय के माहौल में हैं, क्योंकि लगातार कटान जारी रहने पर और घरों के प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।

 

 

 

जिंगनिया मजरा चारों तरफ पानी से घिरा

वहीं जिंगनिया मजरा में हालात बेहद चिंताजनक बताए जा रहे हैं। ग्रामीणों के मुताबिक मजरे के चारों तरफ पानी भर गया है, जिसके कारण लोगों का बाहर निकलना मुश्किल हो गया है।

ग्रामीण नदी और पानी से घिरे होने के कारण सुरक्षित स्थान तक पहुंचने को लेकर चिंतित हैं। बढ़ते जलस्तर और खराब होती परिस्थितियों ने महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों की परेशानी और बढ़ा दी है।

सुबह से अधिकारियों को फोन कर रहे ग्रामीण

स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि वे सुबह करीब 10 बजे से लगातार संबंधित अधिकारियों को फोन कर मदद की गुहार लगा रहे हैं। उनका कहना है कि कई घंटे बीत जाने के बावजूद उन्हें राहत और बचाव के लिए मदद का इंतजार है।

ग्रामीणों की मांग है कि प्रशासन तत्काल प्रभावित इलाकों का जायजा लेकर राहत कार्य शुरू करे और पानी से घिरे लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने की व्यवस्था करे।

हालांकि प्रशासन की ओर से राहत पहुंचने की स्थिति को लेकर आधिकारिक जानकारी का इंतजार है।

प्रभावित परिवारों के सामने रहने और सुरक्षित स्थान तक पहुंचने का संकट

नदी के कटान से प्रभावित परिवारों के सामने केवल घरों के नुकसान का संकट नहीं है, बल्कि सुरक्षित स्थान तक पहुंचना भी बड़ी चुनौती बन गया है। कई लोग अपने घर-गृहस्थी का सामान बचाने में जुटे हुए हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि पानी का स्तर और बढ़ा तथा नदी का कटान जारी रहा तो आसपास के अन्य घर और इलाके भी खतरे की चपेट में आ सकते हैं।

ग्रामीणों ने की तत्काल राहत और बचाव की मांग

प्रभावित ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और तहसील प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की है। उनकी प्रमुख मांगों में शामिल हैं:

  • मौके पर राहत एवं बचाव दल भेजा जाए।
  • पानी में फंसे लोगों के लिए नाव की व्यवस्था की जाए।
  • प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया जाए।
  • भोजन और स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराया जाए।
  • जरूरतमंद लोगों के लिए चिकित्सा सुविधा की व्यवस्था हो।
  • बेघर हुए परिवारों के लिए अस्थायी सुरक्षित आश्रय उपलब्ध कराया जाए।

ग्रामीणों का कहना है कि हालात को देखते हुए प्रशासन की तत्काल सक्रियता बेहद जरूरी है। समय रहते राहत और बचाव कार्य शुरू नहीं होने पर स्थिति और गंभीर हो सकती है।

लगातार बढ़ रहा संकट

धौरहरा क्षेत्र में नदी के कटान और जलभराव की यह स्थिति प्रभावित परिवारों के लिए बड़ी मानवीय चुनौती बन गई है। जिन लोगों के घर नदी की चपेट में आए हैं, उनके सामने अब भविष्य और पुनर्वास को लेकर भी चिंता खड़ी हो गई है।

फिलहाल ग्रामीणों की सबसे बड़ी मांग सुरक्षित स्थान, राहत सामग्री और समय पर प्रशासनिक सहायता है। प्रभावित इलाकों में नदी के कटान की स्थिति पर लगातार नजर रखने और तत्काल राहत-बचाव व्यवस्था की जरूरत बनी हुई है।

 

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