सरकार के नए निर्णय से हजारों परिवारों में लौटी मुस्कान

उत्तर प्रदेश Uttar Pradesh के शिक्षामित्रों के लिए सोमवार का दिन ऐतिहासिक बन गया, जब नौ साल से चल रहा उनका ‘वनवास’ आखिरकार खत्म हो गया। 2017 में मानदेय में भारी कटौती के बाद जो शिक्षामित्र पहले 35–40 हजार रुपये तक कमा रहे थे, वे अचानक 10 हजार रुपये पर आ गए थे। इस फैसले ने हजारों परिवारों को आर्थिक संकट में धकेल दिया था और लगातार आंदोलन, धरना-प्रदर्शन व वार्ताओं का दौर चलता रहा।
शिक्षामित्रों की लंबे समय से चली आ रही इस मांग को देखते हुए राज्य सरकार ने आखिरकार बड़ा फैसला लिया और उनके मानदेय में बढ़ोतरी की घोषणा कर दी। इस फैसले के बाद शिक्षामित्रों में राहत और खुशी की लहर दौड़ गई है। उनका कहना है कि लंबे संघर्ष और अनिश्चितता के बीच यह फैसला उनके जीवन में नई उम्मीद लेकर आया है।
शिक्षामित्रों के संगठन प्रतिनिधियों ने कहा कि पिछले नौ वर्षों में परिवार चलाना बेहद मुश्किल हो गया था। कई शिक्षामित्र आर्थिक तंगी के कारण अतिरिक्त काम करने को मजबूर थे। मानदेय वृद्धि से उन्हें अब फिर से स्थिरता मिलेगी और वे अपनी सेवाओं पर पूरा ध्यान दे पाएंगे।
शिक्षामित्रों ने सरकार के प्रति आभार जताते हुए कहा कि यह फैसला शिक्षा व्यवस्था को भी मजबूत करेगा, क्योंकि अब वे बेहतर तरीके से अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर सकेंगे। वहीं, शिक्षा विभाग ने आश्वासन दिया है कि शिक्षामित्रों के हितों को भविष्य में भी प्राथमिकता दी जाएगी।
यह निर्णय राज्य के लाखों शिक्षामित्रों और उनके परिवारों के लिए नई शुरुआत का संकेत है।