114 राफेल की डील क्यों जरूरी: एयरफोर्स में 13 स्क्वाड्रन की कमी, पाकिस्तान-चीन की बढ़ती एयर पावर से चुनौती

IAF की घटती ताकत, 42 के मुकाबले सिर्फ करीब 29 स्क्वाड्रन सक्रिय

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भारतीय वायुसेना (IAF) की ताकत बढ़ाने के लिए 114 मल्टी-रोल फाइटर एयरक्राफ्ट (MRFA) की डील को बेहद अहम माना जा रहा है। मौजूदा समय में वायुसेना के पास स्वीकृत 42 स्क्वाड्रन के मुकाबले करीब 29 स्क्वाड्रन ही सक्रिय हैं। यानी लगभग 13 स्क्वाड्रन की कमी है, जो आने वाले वर्षों में पुराने विमानों की रिटायरमेंट के बाद और बढ़ सकती है।

राफेल क्यों है अहम?

पहले से शामिल 36 Dassault Rafale विमानों ने भारतीय वायुसेना की मारक क्षमता को काफी बढ़ाया है। ये विमान हवा से हवा और हवा से जमीन पर लंबी दूरी तक सटीक वार करने में सक्षम हैं। मेटेओर मिसाइल और स्कैल्प क्रूज मिसाइल जैसी आधुनिक हथियार प्रणाली इन्हें बढ़त देती है।

114 नए राफेल जैसे मल्टी-रोल फाइटर जेट्स शामिल होने से दो मोर्चों—पश्चिमी (पाकिस्तान) और उत्तरी (चीन) सीमा—पर एक साथ ऑपरेशन की क्षमता मजबूत होगी।

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