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9 अगस्त को राष्ट्रीय पर्व घोषित करे भारत सरकार: राजनाथ

◆स्वाधीनता दिवस की तिथि में बदलाव की उठी मांग, चलाया हस्ताक्षर अभियान

बाराबंकी। अगस्त क्रांति सप्ताह के दूसरे दिन 9़ अगस्त को स्वाधीनता दिवस घोषित किया जाए, इस मांग पर आज नगर के गांधी भवन में हस्ताक्षर अभियान की शुरूआत की गई। बतौर मुख्य अतिथि जिला बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष बृजेश दीक्षित ने स्वतंत्रता दिवस की तिथि में बदलाव की जाने की मांग का पुरजोर समर्थन किया। उन्होंने कहा कि आजादी की असल तारीख 9 अगस्त होनी चाहिए। जब महात्मा गांधी के साथ पूरा देश जन आन्दोलन कर रहा था। नौ अगस्त का दिन जनता की महान घटना थी और हमेशा बनी रहेगी।

संयोजक राजनाथ शर्मा ने कहा कि अगस्त क्रांति दिवस से हस्ताक्षर अभियान की शुरूआत करके देश में एक जन आन्दोलन खड़ा किया जा रहा है। जो युवा पीढी को आजादी के मायने और 9 अगस्त में स्वाधीनता संग्राम जुड़े सेनानियों से रूबरू कराएगा। जिससे 9 अगस्त को भारत में वही सम्मान मिल सके जो अमेरिका में 4 जुलाई और फ्रांस में 14 जुलाई को मिला। स्वतन्त्रता संग्राम के मूल्यों को साझा करने और अगस्त क्रांति के शहीदों को सच्ची श्रद्धांजलि देने के लिए भारत सरकार 9 अगस्त को राष्ट्रीय पर्व घोषित करे।

सेवा सोसाइटी के अध्यक्ष हाजी उमेर किदवई ने कहा कि 9 अगस्त 1942 जब हमने अपनी आजादी की जंग का खुला एलान किया था। 15 अगस्त की अहमियत को समझने के लिए जरूरी है कि हम 9 अगस्त की अहमियत को खास तवज्जो देकर समझें। ये जाने कि दोनों में फर्क क्या है? एक हमें अपनी खुद मुख्तारी की शुरुआत की याद दिलाती है तो दूसरी उसे हासिल करने की हमारी व्यापक जद्दोजहद, हिम्मत, हौसले और एकजुट कुर्बानियों की।

डा लोहिया के शब्दों में कहें तो एक है राज दिवस है और दूसरा जन दिवस। समाजसेवी विनय कुमार सिंह ने कहा कि 1942 महात्मा गांधी के संघर्ष का एक ऐसा क्रांतिकारी काल रहा, जिसमें अंग्रेजी राज के विरुद्ध भारत के जनमानस को निर्णायक संग्राम के लिए ललकारा गया। महात्मा गांधी की ललकार पर लाखों भारतवासी करो या मरो के मंत्र पर अपने जीवन को जंगे-ए-आजादी में आहुत करने के लिए अपने घरों से निकल पड़े। यह एक ऐसा दिन था जो देश की जनता को समर्पित है। इस तिथि को राष्ट्रीय पर्व घोषित किया जाना चाहिए।

इस अवसर पर सेवा सोसाइटी के सचिव अनवर महबूब किदवई, ज़ाहिरा जै़दी, हुमायूं नईम खान, श्रुतिमान शुक्ला, पाटेश्वरी प्रसाद, जीमल-उर-रहमान, मृत्युंजय शर्मा, साकेत मौर्या, सरदार राजा सिंह एडवोकेट, तौफीक अहमद, मो. अदीव इकबाल, पी.के सिंह, मनीष सिंह, शिवा शर्मा, मनीष खेतान, अशोक जासवाल, राहुल यादव सहित कई लोगों ने समर्थन करते हुए हस्ताक्षर किए।

रिपोर्ट- मोहित शुक्ला

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