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बहुचर्चित बिलकिस बानो दुष्कर्म कांड के दोषियों की रिहाई पर भड़के असदुद्दीन ओवैसी-

गुजरात दंगों में बिलकिस बानों के साथ दुष्कर्म के बाद आरोपियों को उम्रकैद की सजा और उसके बाद देश की आजादी की 75वीं वर्षगांठ के मनाने के बाद उन
आरोपियों को गुजरात सरकार रेमिशन पॉलिसी के तहत रिहा कर देती है। असदुद्दीन ओवैसी ने गुजरात सरकार पर हमला बोला है। ओवैसी ने बयान जारी कर आरोप लगाया कि गुजरात हो कठुआ दुष्कर्मियों के साथ खड़ा रहना भाजपा की नीति रही है। ओवैसी ने कहा- ‘हमें अल्लाह का शुक्रिया अदा करना चाहिए कि कम से कम गोडसे (महात्मा गांधी के हत्यारे) को तो फांसी दे दी गई।

एआईएमआईएम के प्रमुख ओवैसी ने यह तंज गुजरात के भाजपा विधायक सीके राउलजी की टिप्पणी पर कसा। राजुल गुजरात सरकार की उस समिति में शामिल थे, जिसने बिलकिस बानो सामूहिक दुष्कर्म कांड के दोषियों की रिहाई की अनुशंसा की थी। गुजरात के गोधरा से भाजपा के मौजूदा विधायक सीके राउलजी का कहना है कि बिल्किस बानो के दुष्कर्म के दोषी 11 लोग ब्राह्मण थे और उनके अच्छे संस्कार थे। उन्होंने क्राइम किया या नहीं यह हमको पता नहीं है, लेकिन किसी को फंसाने का बद इरादा भी हो सकता है।

ओवैसी ने पीएम मोदी को टारगेट करते हुए कहा, ‘प्रधानमंत्री जी ने देश की आजादी की 75वीं वर्षगांठ के मौके पर महिला सशक्तिकरण पर काफी बातें कहीं और वहीं उसी दिन गुजरात सरकार ने उस महिला को जिसकी 3 साल की बेटी का कत्ल कर दिया गया, जिसका 11 लोगों ने मिलकर बलात्कार किया ओवैसी ने कहा कि गुजरात का चुनाव जीतने के लिए बीजेपी की सरकार ने पूरे देश की उन मुस्लिम महिलाओं का अपमान किया जिनका रेप हुआ है और प्रधानमंत्री को झूठा साबित किया।

ओवैसी ने आगे कहा, ‘यहां सबसे तकलीफदेय बात ये है जिसे सुनकर आपको हैरत होगी कि उस रेमिशन पॉलिसी की रिव्यू कमेटी में कौन था? इनमें से एक का नाम था जनाब मूलचंदानी साहब जो गोधरा दंगो में सरकारी गवाह थे। ओवैसी ने केंद्र सरकार के एक नियम का हवाला देते हुए कहा, कि गवर्नमेंट ऑफ इंडिया का एक नियम है, जिसके मुताबिक रेप के आरोपियों को कभी भी 15 अगस्त के दिन नहीं छोड़ा जाना चाहिए।

 

ब्यूरो रिपोर्ट ‘द इंडियन ओपिनियन’

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