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महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री ने लोगों को ‘डिजिटल अरेस्ट’ के प्रति किया जागरूक: कहा—कानून में ऐसा कोई प्रावधान नहीं

साइबर ठगी को लेकर बढ़ते मामलों पर मुख्यमंत्री की चेतावनी—फर्जी कॉल, वीडियो कॉल धमकियों और वर्चुअल कैद के मामलों से रहें सावधान

महाराष्ट्र में बढ़ते ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसे साइबर धोखाधड़ी के मामलों को देखते हुए राज्य के मुख्यमंत्री ने नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह दी है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि भारतीय कानून में ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसा कोई प्रावधान मौजूद नहीं है, इसलिए किसी भी कॉल, वीडियो कॉल या ऑनलाइन धमकी पर विश्वास न करें।

मुख्यमंत्री ने बताया कि हाल के महीनों में कई लोग ऐसे साइबर फ्रॉड का शिकार हुए हैं, जहां ठग अपने आप को पुलिस अधिकारी, सरकारी एजेंसी या साइबर सेल का अधिकारी बताकर लोगों को वीडियो कॉल पर ‘हिरासत’ में ले लेते हैं और घंटों तक डराकर पैसे वसूलते हैं।

उन्होंने कहा कि साइबर अपराधी पहले व्यक्ति को किसी मामले में फंसाने का डर दिखाते हैं, फिर कहते हैं कि “आपको अभी डिजिटल रूप से गिरफ्तार किया जा रहा है।” इसके बाद वे पीड़ित से बैंक डिटेल, UPI भुगतान या भारी रकम ट्रांसफर कराने तक लगातार मानसिक दबाव बनाते रहते हैं।

मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा—
यह पूरी तरह फर्जी और गैरकानूनी गतिविधि है। किसी भी सरकारी एजेंसी में इस तरह की ऑनलाइन गिरफ्तारी की व्यवस्था नहीं है।

सरकार और साइबर विभाग ने लोगों को निम्न चेतावनियाँ दी हैं:

  • किसी भी कॉल पर तुरंत पैसे ट्रांसफर न करें।

  • खुद को सरकारी अधिकारी बताने वाले व्यक्ति की पहचान की पुष्टि करें।

  • अज्ञात वीडियो कॉल पर प्रतिक्रिया न दें।

  • डराने या धमकाने वाली कॉल तुरंत काट दें और रिपोर्ट करें।

राज्य साइबर पुलिस ने भी एक हेल्पलाइन शुरू की है, जहां लोग ऐसे मामलों की शिकायत कर सकते हैं। अधिकारियों का कहना है कि साइबर ठग लगातार अपने तरीके बदल रहे हैं, इसलिए लोगों को जागरूक रहना होगा और किसी भी संदिग्ध कॉल की तुरंत जानकारी देनी चाहिए।

इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर भी बड़ा अभियान शुरू किया जा रहा है ताकि ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में लोग इस तरह की ठगी से बच सकें।

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