कौन बनेगा MLA? Barabanki सदर : Dr. Vivek Singh Verma Vs Dr Satish Chandra Verma ! कौन है योग्य किसमें कितना दम?

दो डॉक्टरों ने सियासत का तापमान बढ़ा दिया है दोनों डॉक्टर एक ही जाति से आते हैं एक ही समुदाय से आते हैं लेकिन उसके बावजूद एक दूसरे के रास्ते में डटकर आमने-सामने खड़े हो गए हैं.

ऐसा लगता है कि एक डॉक्टर साहब कह रहे हैं कि “मैं बेहतर हूं इसलिए मैं चुनाव लड़ूंगा, दूसरे कहते हैं कि नहीं मैं आपसे बेहतर हूं इसलिए मुझे मौका मिलना चाहिए” अब भारतीय जनता पार्टी को मुश्किल फैसला लेना है कि वह टिकट किसे दे?

पहले वाले डॉक्टर साहब डाक्टर विवेक सिंह वर्मा बहुजन समाज पार्टी से 2022 का विधानसभा चुनाव लड़ चुके हैं और हजारों जरूरतमंदों और गरीबों को निशुल्क नेत्र चिकित्सा देकर समाज में एक लोकप्रिय चिकित्सक की छवि बना चुके हैं ।

दूसरी तरफ डाक्टर सतीश चंद्र वर्मा है वह भी सर्जन है वह भी अपना निजी चिकित्सालय चलाते हैं और पिछले कुछ महीनो के भीतर प्रचार प्रसार के दम पर बहुत तेजी के साथ उन्होंने लोगों के बीच अपनी जगह बनाई है ।

इतना ही नहीं कुर्मी समाज की बड़ी टीम डॉ सतीश चंद्र वर्मा के पीछे भी काम कर रही है खास तौर से नवाबगंज विधानसभा के गांव गांव में डॉक्टर सतीश चंद्र वर्मा तेजी से अपना नेटवर्क बना रहे हैं और भारतीय जनता पार्टी के बड़े नेताओं के साथ भी अपनी फोटो सोशल मीडिया पर वायरल करवा रहे हैं ।

डॉक्टर विवेक सिंह वर्मा का सियासी अनुभव थोड़ा ज्यादा दिखाई पड़ता है क्योंकि वह एक विधानसभा चुनाव लड़ भी चुके हैं और लंबे समय से बाराबंकी जिला मुख्यालय की नवाबगंज विधानसभा में सक्रिय हैं

अपनी माताजी स्वर्गीय विजय लक्ष्मी जी के नाम पर वह एक बड़ा नेत्र चिकित्सालय चलते हैं जहां लगभग रोज ही सैकड़ो लोगों का आंखों का ऑपरेशन होता है बताया जाता है कि हजारों गरीबों को वह निशुल्क नेत्र चिकित्सा भी देते रहते हैं ।

लेकिन डॉक्टर सतीश चंद्र वर्मा ने जिस तरह से बाराबंकी के सियासी बाजार में जोरदार एंट्री मारी है उससे कहीं ना कहीं डॉक्टर विवेक सिंह वर्मा की दावेदारी को एक बड़ी चुनौती मिल रही है। डॉ विवेक सिंह वर्मा पिछली बार बसपा से चुनाव लड़े थे और सम्मानजनक वोट हासिल करने के बावजूद चुनाव हार गए थे ।

सूत्रों के अनुसार जब वह बसपा से चुनाव लड़ रहे थे उस समय ही उनके शुभचिंतकों ने उन्हें बता दिया था कि भाजपा से चुनाव लड़ते तो ज्यादा अच्छा होता लेकिन उस समय बसपा में वह सारी “औपचारिकताएं” पूर्ण कर चुके थे चुनावी महासमर में बहुत आगे बढ़ चुके थे

लेकिन उसी समय डॉक्टर विवेक सिंह वर्मा ने तय ही कर लिया था कि यदि बसपा से सफलता नहीं मिलती, विधानसभा नहीं पहुंच पाए तो 2027 में विधानसभा जाने के लिए भगवाधारी बनकर ही आगे बढ़ेंगे। इस बार उनके लिए माहौल अनुकूल था कुर्मी समाज के वोटरों की बड़ी संख्या भी है हालांकि भाजपा के प्रत्याशी को अन्य वर्गों का वोट भी अच्छी संख्या में मिलता है लेकिन डॉक्टर सतीश चंद्र वर्मा की जोरदार चुनौती कहीं न कहीं डॉक्टर विवेक सिंह वर्मा के लिए मुश्किलें जरूर खड़ी कर रही है।

एक ही समुदाय से होने के लिए चलते दोनों लोग भाजपा के लिए उपयोगी हो सकते हैं। क्योंकि 2022 के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को नवाबगंज विधानसभा चुनाव में कुर्मी समाज के पर्याप्त वोट नहीं मिल पाए थे और यदि 27 में कुर्मी समाज में भाजपा को अपना समर्थन दे दिया तो भाजपा के लिए तीसरी बार प्रदेश की सत्ता में आना आसान हो जाएगा ।

शायद इसलिए डॉक्टर विवेक सिंह वर्मा आश्वस्त थे कि उनकी दावेदारी प्रबल है लेकिन डॉक्टर सतीश चंद्र वर्मा के सामने आ जाने से डॉ विवेक सिंह वर्मा की प्रबल दावेदारी के सामने प्रबल आशंका के काले बादल भी छा सकते हैं।

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