
द इंडियन ओपिनियन लखनऊ भारत जैसे विशाल जनसंख्या वाले देश में एक लोक सेवक होना एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी होना अधिकारों के साथ-साथ कर्तव्य बोध का भी बड़ा विषय है।
एक ऐसा देश जहां मिली जुली संस्कृति अलग-अलग भाषा धर्म और पंथ के लोग निवास करते हैं उनके बीच विधि व्यवस्था के रक्षक के रूप में विधि का अनुपालन करने वाली एजेंसी के रूप में कर्तव्य निष्ठा के साथ काम करना सचमुच चुनौती पूर्ण होता है । बात हो रही है प्रांतीय पुलिस सेवा के अधिकारी के रूप में 2003 में राष्ट्र सेवा की यात्रा शुरू करने वाले पुलिस अधिकारी विकास चंद्र त्रिपाठी की जिनकी सराहनीय सेवाओं और कर्तव्य परायणता के लिए कई बार उन्हें शासन एवं वरिष्ठ अधिकारियों के द्वारा अलंकृत किया जा चुका है ।

अब विकास चंद्र त्रिपाठी भारतीय पुलिस सेवा के गौरवशाली संवर्ग का हिस्सा बन चुके हैं लखनऊ में आयोजित नव पदोन्नति आईपीएस अधिकारियों की श्रृंखला में विकास चंद्र त्रिपाठी का भी नाम सुशोभित है जिन्हें पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण और अपर पुलिस महानिदेशक स्थापना प्रशांत कुमार के द्वारा आईपीएस संवर्ग में सुशोभित होने पर शुभकामनाओं के साथ अग्रिम दायित्व के लिए उत्साहित किया गया।

उत्तर प्रदेश पुलिस की स्पेशल टास्कफोर्स में कई सफल ऑपरेशंस के दौरान और अनेक बड़े अपराधियों को कानून के गिरफ्त में लाकर विकास चंद्र त्रिपाठी ने कई बार अपने वरिष्ठ अधिकारियों से प्रशंसा हासिल की और आमजन के जीवन को भी सुरक्षित किया ।
इसके अलावा विश्व के सबसे बड़े आयोजन प्रयागराज के महाकुंभ के दौरान भी भीड़ के उचित प्रबंधन और संवेदनशील सुरक्षा जिम्मेदारियां को सफलतापूर्वक निभाते हुए बाराबंकी के अपर पुलिस अधीक्षक के रूप में भी एक विशाल जनसंख्या वाले जनपद में विभिन्न धार्मिक विश्वास से जुड़े लोगों की सुरक्षा एवं अनेक प्रकार के विवादों का सफल निराकरण करते हुए राजधानी लखनऊ के सबसे समीपस्थ जनपद में विधि व्यवस्था की गरिमा को बनाए रखना भी अपने आप में एक चुनौती पूर्ण कार्य है।
आने वाले समय में भारतीय पुलिस सेवा के सदस्य के रूप में मिलने वाले अन्य दायित्वों के लिए भी विकास चंद्र त्रिपाठी एक सजग समर्पित लोक सेवक के रूप में तैयार है। हम आशा करते हैं कि वह इसी प्रकार देश के लोगों के लिए सेवा सुरक्षा और कर्तव्य के मार्ग पर अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन देते रहेंगे।
द इंडियन ओपिनियन