6 महीने से Physics समेत कई विषयों के शिक्षक नहीं, बोर्ड परीक्षा से पहले पढ़ाई प्रभावित होने का आरोप

लखनऊ। राजधानी में जयप्रकाश नारायण सर्वोदय बालिका विद्यालय की छात्राओं ने शिक्षकों की कमी और हॉस्टल की व्यवस्थाओं को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। छात्राएं हॉस्टल से पैदल मार्च करते हुए दुबग्गा-कानपुर बाईपास पर पहुंचीं और हाईवे पर धरने पर बैठकर चक्काजाम कर दिया। प्रदर्शन के चलते सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं।
6 महीने से Physics समेत कई विषयों के शिक्षक नहीं
प्रदर्शन कर रही छात्राओं का आरोप है कि विद्यालय में पिछले करीब 6 महीनों से Physics समेत कई प्रमुख विषयों के शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं। छात्राओं के मुताबिक बोर्ड परीक्षाओं में अब करीब पांच महीने का समय बचा है और शिक्षकों की कमी के कारण उनकी पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
छात्राओं ने सवाल उठाया कि अगर समय पर विषयवार शिक्षक उपलब्ध नहीं कराए गए तो वे बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी कैसे पूरी करेंगी।

हॉस्टल की व्यवस्थाओं पर भी सवाल
छात्राओं ने सिर्फ शिक्षकों की कमी ही नहीं, बल्कि हॉस्टल की व्यवस्थाओं को लेकर भी शिकायतें कीं। उनका आरोप है कि हॉस्टल में भोजन की गुणवत्ता, साफ-सफाई और चिकित्सा सुविधाओं को लेकर पर्याप्त व्यवस्था नहीं है।
छात्राओं का कहना है कि कई समस्याओं के संबंध में पहले भी जिम्मेदार अधिकारियों को जानकारी दी गई, लेकिन समाधान नहीं होने के बाद उन्हें सड़क पर उतरने के लिए मजबूर होना पड़ा।
ढाई किलोमीटर पैदल मार्च के बाद हाईवे पर धरना
बताया गया कि छात्राएं हॉस्टल से करीब ढाई किलोमीटर पैदल मार्च करते हुए मुख्य सड़क तक पहुंचीं और वहां धरने पर बैठ गईं। देखते ही देखते सड़क पर वाहनों की आवाजाही प्रभावित हो गई और दोनों तरफ लंबा जाम लग गया।
मामले की सूचना मिलने के बाद पुलिस टीम और जिला समाज कल्याण अधिकारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने छात्राओं से बातचीत कर उनकी समस्याएं सुनीं।

शिक्षकों की कमी दूर करने का आश्वासन
प्रशासन की ओर से छात्राओं को शिक्षकों की कमी जल्द दूर करने का लिखित और मौखिक आश्वासन दिया गया। इसके बाद काफी समझाने-बुझाने के बाद छात्राओं ने प्रदर्शन समाप्त किया और यातायात सामान्य हो सका।
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या प्रशासन अपने आश्वासन को समय पर पूरा करेगा?
बोर्ड परीक्षाओं में कुछ ही महीने बाकी हैं। ऐसे में छात्राओं की मांग के मुताबिक शिक्षकों की नियुक्ति और हॉस्टल की व्यवस्थाओं में सुधार कब तक होता है, यह देखने वाली बात होगी।
रिपोर्ट: संदीप चंदेल | द इंडियन ओपिनियन, लखनऊ