बेटे तुषी के साथ की पहल, न्यू लाइफ नशा मुक्ति एवं पुनर्वास केंद्र के संचालक शिव बरन यादव का मिला सहयोग
लखनऊ। जब पूरा देश 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस का जश्न मना रहा था, उसी दौरान राजधानी लखनऊ में आजादी के पर्व को एक सामाजिक संदेश से जोड़ने की अनोखी पहल देखने को मिली। मशहूर जादूगर आफताब हुसैन और उनके बेटे तुषी ने स्वयं पहल करते हुए लोगों को नशे के खिलाफ जागरूक किया और नशामुक्त जीवन अपनाने का संदेश दिया।

इस पहल का उद्देश्य किसी सरकारी कार्यक्रम का आयोजन करना नहीं था, बल्कि समाज में व्यक्तिगत स्तर पर नशे के खिलाफ जागरूकता फैलाना था। आफताब हुसैन और तुषी ने लोगों से बातचीत कर उन्हें नशे के दुष्परिणामों के बारे में समझाया और नशे की लत से बाहर निकलने के लिए सही उपचार एवं मार्गदर्शन लेने की अपील की।
इस जागरूकता पहल में न्यू लाइफ नशा मुक्ति एवं पुनर्वास केंद्र के संचालक शिव बरन यादव का भी पूरा सहयोग रहा। इस दौरान करीब 50 लोगों को नशा छोड़ने, नशे की लत से बाहर निकलने और पुनर्वास की प्रक्रिया से जुड़ी जानकारी दी गई।

नशा सिर्फ व्यक्ति नहीं, परिवार को भी प्रभावित करता है
आफताब हुसैन ने लोगों को संदेश दिया कि नशे की समस्या केवल किसी एक व्यक्ति तक सीमित नहीं रहती। इसका सीधा असर परिवार, बच्चों और समाज पर पड़ता है। समय रहते जागरूकता, सही काउंसलिंग और उपचार के जरिए नशे की लत से बाहर निकलने की दिशा में कदम उठाया जा सकता है।
इस पहल के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की गई कि आजादी सिर्फ गुलामी से मुक्ति का नाम नहीं है। अगर कोई व्यक्ति नशे की गिरफ्त में है, तो उसे उस लत से बाहर निकालना भी एक तरह की आजादी है।
सरकार से भी बड़ा सवाल
इस पूरी पहल के बीच सरकार और प्रशासन से भी एक महत्वपूर्ण सवाल सामने आता है।
जब समाज के लोग और नशामुक्ति से जुड़े संस्थान अपने स्तर पर लोगों को नशे से दूर करने और उनके जीवन को बेहतर बनाने का प्रयास कर रहे हैं, तो क्या सरकार को ऐसी सामाजिक पहलों और नशामुक्ति केंद्रों को और अधिक सहयोग नहीं देना चाहिए?
अगर किसी व्यक्ति को नशे की गिरफ्त से बाहर निकालकर उसे सामान्य जीवन की ओर लौटने में मदद मिलती है, तो इसका सकारात्मक असर सिर्फ उस व्यक्ति पर नहीं बल्कि उसके पूरे परिवार पर पड़ता है।
ऐसी पहलों को प्रोत्साहन, जागरूकता और उचित संसाधनों का सहयोग मिले तो नशामुक्त समाज के निर्माण की दिशा में प्रयास और मजबूत हो सकते हैं।
15 अगस्त की इस पहल ने देशभक्ति के साथ एक और संदेश दिया—सच्ची आजादी तभी है, जब इंसान अपने जीवन को नशे जैसी बुराइयों से भी आजाद कर सके।
रिपोर्ट: द इंडियन ओपिनियन | लखनऊ