कम उत्पादन, सीमित स्टॉक और सटोरिया खरीद से बढ़ी बाजार की चिंता

नई दिल्ली। देश में चीनी की कीमतों में हालिया तेजी के बीच इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ISMA) ने स्पष्ट किया है कि भारत में चीनी की कोई वास्तविक कमी नहीं है। संगठन के अध्यक्ष नीरज शिरगांवकर ने सोमवार को कहा कि देश में घरेलू खपत और आगामी त्योहारी सीजन की मांग पूरी करने के लिए पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। उन्होंने बाजार में घबराकर खरीदारी करने की जरूरत से भी इनकार किया।

ISMA के मुताबिक, हाल में चीनी की कीमतों में आई तेजी के पीछे मुख्य कारण वास्तविक आपूर्ति संकट नहीं, बल्कि सट्टा खरीद, कारोबारियों और थोक उपभोक्ताओं की ओर से जरूरत से पहले स्टॉक जमा करना और मौसम संबंधी कारणों से उत्पादन में कमी हैं। संगठन का कहना है कि कुछ बड़े खरीदार सामान्य तौर पर जितनी मात्रा तत्काल जरूरत के हिसाब से खरीदते थे, उससे पहले ही डेढ़ से दो महीने का स्टॉक रखने लगे। इससे बाजार में उपलब्ध चीनी का एक हिस्सा गोदामों में चला गया और कृत्रिम रूप से आपूर्ति तंग दिखाई देने लगी।

ISMA के अनुसार, 2025-26 सीजन में शुद्ध चीनी उत्पादन करीब 279 लाख टन रहने का अनुमान है, जबकि सितंबर के अंत तक लगभग 35 लाख टन का क्लोजिंग स्टॉक रहने की उम्मीद है। संगठन इसे सामान्य घरेलू मांग के लिए पर्याप्त बफर मान रहा है। वहीं चीनी मिलों के नए पेराई सत्र से अक्टूबर में लगभग 10-12 लाख टन अतिरिक्त उत्पादन आने की उम्मीद है।
सरकार ने कीमतों को स्थिर करने के लिए 10 लाख टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति भी दी है। ISMA का कहना है कि यह कदम कमी पूरी करने के बजाय बाजार में भरोसा और स्थिरता बनाए रखने के लिए उठाया गया है।
संगठन को उम्मीद है कि सट्टा स्टॉकिंग कम होने और नई आपूर्ति आने के साथ आने वाले दिनों में खुदरा चीनी की कीमतों में नरमी देखने को मिल सकती है।