
हाल ही में सामने आई सैटेलाइट तस्वीरों में Yemen के मयून (Perim) द्वीप पर एक पूरी तरह विकसित हवाई पट्टी दिखाई दी है। रनवे, हैंगर और मजबूत सैन्य ढांचे साफ नज़र आते हैं, लेकिन हैरानी की बात यह है कि अब तक किसी भी देश ने इस एयरबेस की जिम्मेदारी नहीं ली है।

मयून द्वीप Bab-el-Mandeb Strait के बिल्कुल बीचोंबीच स्थित है—वह समुद्री संकीर्ण मार्ग जहाँ से दुनिया का लगभग 10–12% वैश्विक व्यापार गुजरता है। यही रास्ता लाल सागर को अदन की खाड़ी और हिंद महासागर से जोड़ता है, जिससे इसकी सामरिक अहमियत और भी बढ़ जाती है।
क्षेत्र पहले से ही लाल सागर में हमलों, जहाज़ों की सुरक्षा और नौसैनिक तैनाती को लेकर तनावग्रस्त है। ऐसे माहौल में एक अज्ञात एयरबेस का उभरना केवल सैन्य निर्माण नहीं, बल्कि रणनीतिक संकेत भी माना जा रहा है—खासकर तब, जब कोई औपचारिक दावा या स्पष्टीकरण मौजूद नहीं है।

अतीत में इस क्षेत्र में विदेशी सैन्य मौजूदगी और गुप्त लॉजिस्टिक ठिकानों की चर्चाएं रही हैं, लेकिन मयून का मामला अलग है—यह निर्माण तेज़, स्थायी और उच्च-स्तरीय सैन्य उपयोग की ओर इशारा करता है। सवाल यह नहीं कि एयरबेस क्यों बना, बल्कि यह है कि किस उद्देश्य और किसके लिए।
जब वैश्विक शक्तियाँ सार्वजनिक मंचों पर शांति की बात कर रही हैं, तब मयून द्वीप पर यह खामोश रनवे याद दिलाता है—असल भू-राजनीति अक्सर सैटेलाइट तस्वीरों में लिखी जाती है, बयानों में नहीं।
रिपोर्ट – विकास चंद्र अग्रवाल
-द इण्डियन ओपिनियन