भारतीय प्रमाणन को मान्यता देने और नियामकीय बाधाएं घटाने पर जोर

नई दिल्ली। भारत और जापान के बीच बढ़ते व्यापारिक संबंधों के बीच व्यापार घाटे में लगातार हो रही बढ़ोतरी को लेकर उद्योग जगत ने चिंता जताई है। फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (FICCI) के अध्यक्ष अनंत गोयनका ने कहा कि दोनों देशों के बीच व्यापार तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन भारत के पक्ष में संतुलन बनाने के लिए जापानी बाजार में भारतीय कंपनियों की पहुंच आसान करना जरूरी है।
आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में भारत और जापान के बीच द्विपक्षीय व्यापार 27.47 अरब डॉलर रहा, जो पिछले वित्त वर्ष के 25.16 अरब डॉलर की तुलना में 9.18 प्रतिशत अधिक है। हालांकि, व्यापार बढ़ने के साथ भारत का जापान के साथ घाटा भी बढ़ा है। 2025-26 में यह घाटा 15.4 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जबकि 2024-25 में यह 12.66 अरब डॉलर था। इस अवधि में भारत ने जापान को 6.03 अरब डॉलर का निर्यात किया, जबकि जापान से 21.43 अरब डॉलर का आयात किया गया।

FICCI अध्यक्ष ने कहा कि भारतीय निर्यातकों के सामने जापानी बाजार में कई नियामकीय और प्रमाणन संबंधी चुनौतियां हैं। खासतौर पर फार्मास्युटिकल क्षेत्र की कंपनियों को अपने उत्पादों के पंजीकरण में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने भारतीय प्रमाणपत्रों को जापान में अधिक मान्यता देने की मांग की, जिससे भारतीय कंपनियों के लिए बाजार में प्रवेश आसान हो सके।

इस बीच, भारत व्यापार और निवेश संबंधों को मजबूत करने के लिए जापान के साथ सक्रिय बातचीत कर रहा है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल 24 से 27 अगस्त तक जापान के दौरे पर हैं और उनके साथ करीब 200 सदस्यों का कारोबारी प्रतिनिधिमंडल भी गया है। प्रतिनिधिमंडल में सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स, मैन्युफैक्चरिंग, ऑटोमोबाइल, स्वच्छ ऊर्जा, स्टील, स्वास्थ्य और स्टार्टअप समेत कई क्षेत्रों की कंपनियां शामिल हैं।
भारत-जापान सहयोग के लिए सेमीकंडक्टर, हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग, डेटा सेंटर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, जहाज निर्माण और महत्वपूर्ण खनिज जैसे क्षेत्रों को अहम माना जा रहा है। FICCI का मानना है कि इन क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाकर दोनों देशों के व्यापार संबंधों को अधिक संतुलित बनाया जा सकता है।