22 शहरी निकायों ने बॉन्ड से जुटाए ₹4500 करोड़, शहरों के विकास को मिला नया सहारा

सेबी प्रमुख ने बताया— म्युनिसिपल बॉन्ड से इंफ्रास्ट्रक्चर विकास, पारदर्शिता और निवेशकों के भरोसे को मिलती है मजबूती

देश के शहरी विकास के लिए म्युनिसिपल बॉन्ड एक अहम वित्तीय साधन बनकर उभर रहे हैं। FY26 तक देश के 22 शहरी निकायों ने बॉन्ड के जरिए करीब ₹4500 करोड़ जुटाए हैं। यह फंड शहरों में बुनियादी ढांचे, जल आपूर्ति, सड़क निर्माण, सीवरेज और अन्य सार्वजनिक सुविधाओं के विकास में इस्तेमाल किया जा सकता है।

सेबी प्रमुख के अनुसार, म्युनिसिपल बॉन्ड इसलिए महत्वपूर्ण हैं क्योंकि इससे शहरी निकायों को पारंपरिक सरकारी फंडिंग पर पूरी तरह निर्भर नहीं रहना पड़ता। इससे स्थानीय निकाय सीधे पूंजी बाजार से धन जुटा सकते हैं, जिससे विकास परियोजनाओं को गति मिलती है।

इसके अलावा, बॉन्ड के जरिए फंड जुटाने की प्रक्रिया पारदर्शिता और जवाबदेही को भी बढ़ावा देती है, क्योंकि निवेशकों का भरोसा बनाए रखने के लिए वित्तीय अनुशासन जरूरी होता है। विशेषज्ञों का मानना है कि तेजी से बढ़ते शहरीकरण के दौर में शहरों की जरूरतें भी बढ़ रही हैं, ऐसे में ऐसे वैकल्पिक वित्तीय मॉडल बेहद जरूरी हैं।

यदि अधिक नगर निकाय इस मॉडल को अपनाते हैं, तो शहरों में बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर, तेज विकास और नागरिक सुविधाओं में सुधार देखने को मिल सकता है। यह भारत के शहरी भविष्य के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

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