36 साल पुराने Tiananmen Square crackdown पर चीन की Communist Party के रुख को लेकर फिर चर्चा तेज

बीजिंग। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की ओर से 1989 के तियानमेन स्क्वायर प्रदर्शन से जुड़े कम्युनिस्ट पार्टी के पुराने फैसले को सही ठहराए जाने की बात सामने आई है। इस बयान के बाद करीब चार दशक पुराने तियानमेन आंदोलन और उस पर हुई सैन्य कार्रवाई को लेकर चर्चा फिर तेज हो गई है।
1989 में बीजिंग के तियानमेन स्क्वायर पर हजारों प्रदर्शनकारी राजनीतिक सुधार, भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई और अधिक राजनीतिक स्वतंत्रता जैसी मांगों को लेकर जुटे थे। कई सप्ताह तक चले प्रदर्शन के बाद चीनी सेना ने 4 जून 1989 को कार्रवाई की। सेना ने टैंकों और हथियारबंद जवानों के साथ प्रदर्शनकारियों को हटाया।

इस कार्रवाई में बड़ी संख्या में लोगों के मारे जाने की खबरें सामने आई थीं, हालांकि चीन की सरकार ने मृतकों की संख्या को लेकर सीमित आधिकारिक आंकड़े ही जारी किए। मानवाधिकार संगठनों और विभिन्न अंतरराष्ट्रीय स्रोतों में मृतकों की संख्या को लेकर अलग-अलग अनुमान मिलते हैं।
तियानमेन की घटना चीन के इतिहास के सबसे संवेदनशील और विवादित अध्यायों में शामिल है। चीन में इस घटना की सार्वजनिक चर्चा और स्मरण पर आज भी कड़े प्रतिबंध हैं।

शी जिनपिंग के रुख को इसी ऐतिहासिक संदर्भ में देखा जा रहा है। उनके कथित बयान ने एक बार फिर सवाल खड़ा किया है कि क्या 1989 में लिया गया सैन्य कार्रवाई का फैसला वास्तव में सही था, या इतिहास के इस अध्याय पर चीन को आज भी खुलकर चर्चा करनी चाहिए?
⚠️ जरूरी संदर्भ
तियानमेन दमन में मारे गए लोगों की सटीक संख्या आज भी विवादित है। इसलिए किसी एक संख्या को अंतिम आंकड़े के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं होगा।