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सुप्रीम कोर्ट का अपमान करने के आरोप में अवमानना की कार्यवाही में वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने यह सफाई दी!

प्रशांत भूषण ने कहा कि मुझे यह सुनकर दुःख हुआ है कि मुझे अदालत की अवमानना का दोषी ठहराया गया है।

प्रशांत भूषण – मैं इस बात से दुखी नहीं हूं कि मुझे सजा हो सकती है बल्कि इस बात से दुखी हूं कि मुझे गलत समझा गया।

प्रशांत भूषण ने कहा कि मेरा मानना है कि लोकतंत्र और इसके मूल्यों की रक्षा के लिए एक खुली आलोचना आवश्यक है।

मेरे ट्वीट्स मेरे कर्तव्यों का निर्वहन करने का प्रयास हैं, मेरे ट्वीट्स को संस्था की भलाई के लिए काम करने के प्रयास के रूप में देखा जाना चाहिए।

राजीव धवन ने सवाल उठाते हुए कहा कि अगर न्यायपालिका में कोई भ्रष्टाचार होता है, तो हम इसे कैसे उजागर करना चाहिए।

राजीव धवन ने कहा अपराध की प्रकृति क्या है, अपराध की प्रकृति कैसी है, यह भी देखा जाना चाहिए।

वरिष्ठ वकील राजीव धवन ने प्रशांत भूषण के बचाव में दलील देते कहा कई महत्वपूर्ण मामलों 2G घोटाला, कॉल ब्लॉक घोटाला, गोवा माइनिंग,  CVC नियुक्ति सभी मामलों में कोर्ट के सामने प्रशांत भूषण ही आये थे।

सजा देते समय कोर्ट को प्रशांत भूषण के इन योगदान को देखना चाहिए।

जस्टिस अरुण मिश्रा – हम ‘फेयर क्रिटिसिज्म’ के खिलाफ नहीं है, हम इसका स्वागत करते हैं, मैंने अपने पूरे करियर में एक भी व्यक्ति को कोर्ट की अवमानना ​​का दोषी नहीं ठहराया है।

जस्टिस मिश्रा – अच्छे काम करने का स्वागत है हम आपके अच्छे मामलों को दाखिल करने के प्रयासों की सराहना करते हैं।

जस्टिस मिश्रा ने कहा कि संतुलन और संयम की आवश्यकता है, आप सिस्टम का हिस्सा हैं अधिक करने के उत्साह में, आपको लक्ष्मण रेखा को पार नहीं  चाहिए, अगर आप अपनी टिप्पणियों को संतुलित नहीं करते हैं, तो आप संस्था को नष्ट कर देंगे, हम अवमानना के लिए इतनी आसानी से दंड नहीं देते।

प्रशांत भूषण – मेरे ट्वीट जिनके आधार पर अदालत की अवमानना का मामला माना गया है दरअसल वो मेरी ड्यूटी हैं, इससे ज्यादा कुछ नहीं। इसे संस्थानों को बेहतर बनाए जाने के प्रयास के रूप में देखा जाना चाहिए था।

भूषण ने कहा मैंने जो लिखा है वो मेरी निजी राय है, मेरा विश्वास और विचार है, ये राय और विचार रखना मेरा अधिकार है, मैंने अपनी संवैधानिक ज़िम्मेदारी का निर्वहन किया है। माफी मंगाना कर्त्तव्य की उपेक्षा करना होगा, आपको जो सही लगे, वो सज़ा दे।

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