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कोई भी लक्ष्य मेहनत और साहस से बड़ा नहीं, हारता वही है जो ठीक से लड़ा नहीं -डॉ विवेक सिंह वर्मा

नवाबगंज विधानसभा से बहुजन समाज पार्टी के प्रभारी और प्रत्याशी के रूप में चुनावी मैदान में जनता का समर्थन हासिल करने में जुटे डॉक्टर विवेक सिंह वर्मा लंबे समय से एक समाजसेवी और चिकित्सक के रूप में सक्रिय हैं।

लेकिन इसके साथ उनकी पहचान एक मोटिवेशनल स्पीकर की भी है वह नौजवानों को प्रेरित करके बेहतर भविष्य की ओर आगे बढ़ाने में भी यकीन करते हैं और चुनावी जनसंपर्क के दौरान गांव देहात के युवाओं और अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं को भी हमेशा निराशा और नकारात्मक विचारों से दूर रहने के लिए मार्गदर्शन देते हैं।

मनुष्य को निराशा और नकारात्मक विचारों से दूर रहना चाहिए क्योंकि ईश्वर ने अपार क्षमताएं दी हैं:

अपने कार्यकर्ताओं के साथ एक बैठक में डॉ विवेक सिंह वर्मा ने कहा कि मनुष्य के लिए जीवन में कोई भी लक्ष्य बड़ा नहीं क्योंकि ईश्वर ने मनुष्य में अपार क्षमताएं प्रदान की हैं ।
जरूरत सिर्फ इस बात की है कि मनुष्य ठंडे दिमाग से अपने वरिष्ठ जनों के मार्गदर्शन में अपने लक्ष्य को निर्धारित करें और उस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए ईमानदारी से लगातार प्रयास करें शुरुआत के कुछ प्रयासों में यदि विफलता भी मिलती है तो मनुष्य को अपने प्रयास जारी रखना चाहिए। यदि वह पूरे मनोयोग से प्रयास करता है तो ईश्वर जरूर उसके लक्ष्य में उसे विजय प्रदान करते हैं और कठिन से कठिन लक्ष्य भी मनुष्य कठिन परिश्रम मनोयोग और ईमानदारी के साथ जरूर हासिल कर लेता है।

ज्यादा मेहनत से नहीं गलत दिनचर्या और नकारात्मक विचारों से मनुष्य जल्दी थक जाता है:

इसी बात को वाक्य में पिरो कर डॉक्टर विवेक सिंह वर्मा कहते हैं कि “मानव के साहस से कुछ भी बड़ा नहीं हारा वही जो ठीक से लड़ा नहीं” । डॉक्टर विवेक सिंह वर्मा प्रतिदिन अपने चिकित्सालय में पूरे अनुशासन के साथ प्राथमिकता पर आए हुए मरीजों की चिकित्सा और सर्जरी के लिए कार्य करने के बाद जनसंपर्क और राजनैतिक अभियानों में निकलते हैं ।

प्रातः काल जल्दी उठने के बाद दिन भर सक्रिय रहते हुए वह देर रात तक बसपा प्रत्याशी के रूप में गांव गांव का भ्रमण करते हैं जनता और कार्यकर्ताओं के बीच रहते हैं इसके बावजूद चेहरे पर मुस्कान और विनम्र व्यवहार के साथ तरोताजा बने रहते हैं। डॉक्टर वर्मा के मुताबिक अधिक परिश्रम थकान का प्रमुख कारण नहीं है थकान का प्रमुख कारण काम में मन ना लगाना नकारात्मक विचार और अनुशासन का पालन न करना है। यदि कार्यों को अनुशासन से किया जाए तो बड़े से बड़े कार्यों को करने के बाद भी मनुष्य संतुष्टि और प्रसन्नता के भाव में रहता है।

द इंडियन ओपिनियन
बाराबंकी

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