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समाजवाद को चाहिए ब्राह्मणवाद का सहारा, “कृष्ण-सुदामा” की प्रीति बदल सकती है राजनीति की रीति!

समाजवादी पार्टी बीजेपी को हराने के लिए मजबूत किलेबंदी करने में जुटी है इसके लिए पार्टी सभी वर्गों के उन नेताओं पर फोकस कर रही है जिनका अपनी जातियों पर बड़ा प्रभाव है यानी जो जातिवाद के लिए मशहूर है या फिर अपनी जातियों के क्षत्रप माने जाते हैं । पूर्वांचल के चर्चित बाहुबली नेता पूर्व कैबिनेट मंत्री हरिशंकर तिवारी के पूरे परिवार को समाजवादी पार्टी में शामिल करवाने के बाद अब अखिलेश यादव की नजर अंबेडकर नगर जनपद के ताकतवर ब्राह्मण परिवार पर है जिसका कई जनपदों में प्रभाव माना जाता है । अंबेडकर नगर सुल्तानपुर अयोध्या समेत कई जिलों में पूर्व सांसद राकेश पांडे का प्रभाव माना जाता है उनके परिवार में कई नेता हैं उनके बेटे बहुजन समाज पार्टी के सांसद और वह स्वयं सांसद और विधायक रह चुके हैं अब वह बसपा छोड़कर सपा में शामिल होने वाले हैं।

अंबेडकरनगर के पूर्व सांसद राकेश पांडे का पुत्र सांसद का कई जिलों में है प्रभाव:

उन्होंने और उनके कई समर्थकों ने अपनी गाड़ियों में सपा के झंडे लगा लिए । अंबेडकर नगर जनपद में इस खबर से सनसनी फैल गई है लोग मान कर चल रहे हैं कि अब अंबेडकरनगर में समाजवादी पार्टी सभी विधानसभाओं पर अच्छा प्रदर्शन करेगी क्योंकि राकेश पांडे न सिर्फ जिले के सबसे बड़े व्यापारियों में शामिल हैं बल्कि जिले के सबसे ताकतवर नेताओं में भी गिने जाते हैं। हालांकि उनके बेटे जो कि अभी भी बसपा से सांसद हैं उनके सामने धर्म संकट पैदा हो गया है। अभी उन्होंने खामोशी ओढ़ रखी है।

ओपिनियन मेकर ब्राह्मणों पर है समाजवादी पार्टी का फोकस:

भारतीय जनता पार्टी को 2017 में मिले प्रचंड बहुमत के बाद अखिलेश यादव और समाजवादी पार्टी के नीति निर्माताओं का इस बात पर फोकस है कि हिंदू समाज की सभी बड़ी जातियों को सपा से “येन केन प्रकारेण” जोड़ा जाए इसके लिए समाजवादी पार्टी का फोकस पिछड़ी जातियों के साथ-साथ ब्राह्मण समाज पर है क्योंकि ब्राह्मण समाज सामान्य वर्गों में सबसे प्रमुख वोटर माना जाता है और ओपिनियन मेकर भी ।

ब्राह्मणवादी नेताओं में है समाज के वोट डाइवर्ट कराने की क्षमता:

अब ब्राह्मणवादी नेताओं को अन्य दलों से तोड़ने पर सपा का ध्यान केंद्रित है । यहां ब्राह्मणवादी शब्द इसलिए मायने रखता है क्योंकि जातियों के नेता वही माने जाते हैं जो अपनी जातियों के लिए खुलकर जातिवाद करते हैं पक्षपात भी करते हैं तभी वह जातियों के नेता और क्षत्रप बन पाते हैं जो जातियों में जातिवाद और पक्षपात नहीं करते वह सर्व समाज के नेता होते हैं फिलहाल भारतीय राजनीति में सर्व समाज के नेताओं का अभाव रहा है जो कि वर्तमान में भी है मुलायम मायावती जैसे नेताओं पर भी जातिवाद के आरोप लगते रहे अपनी जातियों का पक्ष लेने और पक्षपात करने के लिए दूसरे दलों के नेताओं के निशाने पर रहे ,कुछ लोग यही आरोप योगी आदित्यनाथ पर भी लगाते हैं ।

सपा का ब्राह्मण प्रेम देखकर बीजेपी परेशान :

फिलहाल समाजवादी पार्टी का ब्राह्मण प्रेम देखकर भाजपा के नीति निर्माता हैरान और परेशान हैं क्योंकि वह समझते हैं कि यदि यादव मुस्लिम थोक वोट बैंक के साथ-साथ ब्राह्मण समाज का भी आशीर्वाद समाजवादी पार्टी को मिल गया तो “कृष्ण और सुदामा” की पुरानी दोस्ती के सिद्धांत पर आधुनिक युग के राजनीतिक महाभारत में समाजवादी पार्टी अपनी विजय को सुनिश्चित कर सकती है।

दीपक मिश्रा
द इंडियन ओपिनियन लखनऊ

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