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योगी के गढ़ गोरखपुर और फूलपुर में करारी हार के बाद.. नया संग्राम ..योगी समर्थकों ने पार्टी पर लगाए यह गंभीर आरोप ..सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा यह विवादित संदेश

हिंदू युवा वाहिनी और योगी आदित्यनाथ का गढ़ गोरखपुर और फूलपुर का परिणाम उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व के साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की केंद्र सरकार के द्वारा जन सामान्य की भावनाओं के विपरीत कार्यशैली का भी परिणाम जा रहा है …

कारण जो भी हो लेकिन बीजेपी के बीच उपचुनाव के परिणाम ने गुटबाजी और आरोप प्रत्यारोप को जन्म जरूर दे दिया है , हालांकि अभी पर्दे के पीछे से चलने वाले शीत युद्ध की शुरुआत है .. नेता खुलकर तो कुछ नहीं बोल रहे ..
लेकिन सोशल मीडिया पर समर्थक ऐसे संदेश फैला रहे हैं
जो पार्टी को कटघरे में खड़ा करते हैं .. यह संदेश जो आगे आप पढ़ेंगे खूब वायरल हो रहा है मुख्यमंत्री योगी का खुलकर बचाव करने के लिए उनके समर्थक फैला रहे हैं..

आखिर उत्तर प्रदेश के वर्तमान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी स्वतन्त्र मुख्यमंत्री हैं या मुखौटा?????

ये यक्ष प्रश्न काफी दिनों से चर्चा में है।

आइये सच्चाई के दर्शन करें।

–राज्य की प्रशासनिक मशीनरी में ट्रांसफर पोस्टिंग का का सारा काम संगठन मंत्री सुनील बंसल और मोदी जी के प्रधान सचिव नृपेंद्र मिश्र के हाथ में है, वरिष्ठ अधिकारी सीधा उन्हें ही रिपोर्टिंग करते हैं
कई अधिकारियो को योगी जी चाहकर भी हटा नही पाए,न पसन्दीदा अधिकारी तैनात कर पाए!!!!!

–सुलखान सिंह के रिटायर होने के बाद योगी जी ने ओपीसिंह को यूपी का नया डीजीपी बनाने का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा, जिसे जानबूझकर एक महीना तक केंद्र की मोदी सरकार ने लटका कर रखा, एक महीना तक यूपी पुलिस बिना डीजीपी के रही!!
क्या इससे देश के सबसे बड़े राज्य के मुख्यमंत्री का अपमान नही हुआ??
क्या उनके प्रभाव पर इससे पृश्नचिन्ह नही लगता??

–निकाय चुनाव में गोरखपुर की सीट पर योगी जी धर्मेन्द्र सिंह को मेयर का टिकट दिलाना चाहते थे पर हद की बात है कि मुख्यमंत्री की इच्छा को दरकिनार करते हुए उनके घर में मेयर का टिकट सुनील बंसल ने किसी दूसरे को दिया और उसे जिताने की जिम्मेदारी योगी पर थोप दी,जैसे तैसे मामूली अंतर से वो जीत पाए!!!

क्या एक राज्य के मुख्यमंत्री को अपने जिले का मेयर प्रत्याशी चुनने का भी अधिकार नही है????

–हाल ही में राज्यसभा टिकट का बंटवारा हुआ है, राजा भैया के बेहद ख़ास एमएलसी यशवन्त सिंह ने योगी जी के लिए विधानपरिषद से इस्तीफा दिया जिस सीट पर योगी जी उपचुनाव लड़कर सदन में पहुंचे।
उस समय यशवन्त सिंह को राज्यसभा टिकट दिए जाने का आश्वासन दिया गया था,इसी भरोसे राजा भैया ने फूलपुर लोकसभा में जमकर बीजेपी के लिए प्रचार भी करवाया।

कुछ दिन पहले तक ये तय भी माना जा रहा था कि यशवन्त सिंह को योगी जी राज्यसभा में भिजवा देंगे पर आश्चर्यजनक रूप से यशवन्त सिंह का टिकट काटकर हरनाथ सिंह यादव को थमा दिया गया!!
योगी ने पूरा जोर लगा दिया पर टिकट नही दिलवा पाए और यशवन्त सिंह के साथ विश्वासघात हो गया!!

क्या यूपी के मुख्यमंत्री को राज्यसभा की 10 सीटो में से किसी एक पर अपनी पसन्द का उम्मीदवार बनवाने का भी हक नही है????

-अब बारी गोरखपुर लोकसभा उपचुनाव की आई जहाँ तीन दशक से योगी जी के मठ का दबदबा रहा है,
योगी जी ने कई नाम सुझाए जिनमे उनके मठ से जुड़े एक ब्राह्मण सहयोगी, निकाय चुनाव में ठुकराए गए धर्मेन्द्र सिंह और अंत में मठ से जुड़े दलित जाति में जन्मे योगी कमलनाथ का नाम सुझाया।
योगी कमलनाथ को टिकट मिलता तो आसानी से वो सीट निकाल देते।

पर हैरत की बात है कि योगी को नीचा दिखाने के लिए उनके धुर विरोधी रहे शिवप्रताप शुक्ल के विश्वस्त उपेन्द्र शुक्ल को उम्मीदवार बना दिया गया और उसे जिताने की जिम्मेदारी योगी पर सौंप दी गयी!!!!!!!!

पहले योगी की पसन्द के उम्मीदवार को ठुकराकर उनके विरोधी पक्ष को टिकट थमा दिया, उसपर भी योगी ने अपनी प्रतिष्ठा बचाने को उपेन्द्र शुक्ल को जिताने को पूरा जोर लगा दिया,
फिर जिन लोगो ने साजिश करके टिकट करवाया, उन्होंने ही बसपा नेता हरिशंकर तिवारी से मिलकर उपेन्द्र शुक्ल को हरवा भी दिया जिससे हार का जिम्मेदार योगी को बताकर उनकी छवि को ध्वस्त किया जा सके!!!

क्या एक मुख्यमंत्री को अपनी परम्परागत सीट पर अपनी मर्जी से उम्मीदवार चुनने का हक नही है?????

असल में योगी जी बेचारे मुखौटा भर हैं शासन प्रशासन को सीधे अमित शाह सुनील बंसल के माध्यम से चला रहे हैं, योगी जी सिर्फ नाम के मुख्यमंत्री हैं l….

हालांकि इस संदेश के कुछ तथ्य सही प्रतीत होते हैं..
उत्तर प्रदेश की सरकार में बीजेपी संगठन मंत्री सुनील बंसल का हस्तक्षेप और अधिकारियों की ट्रांसफर पोस्टिंग में उनके प्रभाव की अक्सर चर्चा होती रहती है..

लेकिन भारतीय जनता पार्टी को यह ध्यान रखना चाहिए कि देश और प्रदेश की जनता ने उनके ऊपर बहुत विश्वास करके पूरी भावुकता के साथ एक बड़ा बहुमत दिया है.. और यह बहुमत इस बात के लिए दिया है कि देश और प्रदेश के लोगों के वास्तविक कल्याण के लिए ऐसे काम किए जाएं जिनका जन सामान्य के हितों पर दूरगामी परिणाम हो..

बढ़ती जनसंख्या बढ़ता प्रदूषण अराजकता भ्रष्टाचार आंतरिक और बाह्य सुरक्षा के चिंताजनक हालात ..ऐसी चुनौतियां हैं जिन पर भाजपा की राज्य और केंद्र की सरकारों को गंभीरता से काम करने की जरूरत है..